सोने और चांदी के दामों में उछाल की असली वजह आई सामने

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। सोने और चांदी के दाम लगातार आॅल टाइम हाई पर हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार 28 जनवरी को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 5,734 रुपए बढ़कर 1,64,635 रुपए पर पहुंच गया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द इसके दाम कम होने वाले नहीं है। अब सोने के दाम इतने क्यों बढ़ रहे हैं इस बारे में बेहद चौंकाने वाली जानकारी मिली है।

इंटरनेट की दुनिया में पूछे जा रहें सवाल

इंटरनेट की दुनिया इन दिनों एक सवाल खूब पूछा जा रहा है। यह सवाल है कि आखिर सोने और चांदी के दाम तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं। नेट की दुनिया में इसके कई जवाब भी तैरते मिल जाएंगे, लेकिन ये सारे जवाब हकीकत से परे हैं। अभी तक सामने आई रिपोर्ट के आधार पर यह पता चला था कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड खरीद रहे हैं। यही सोने की कीमतों में भारी उछाल की असली वजह है। यदि आप भी इन रिपोर्टस् पर भरोसा कर रहे हैं तो यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। लगातार बढ़ते गोल्ड प्राइस का लिंक स्विट्जरलैंड के एक परमाणु बंकर से मिला है। यहां एक कंपनी ने करीब 140 टन सोना जमा किया है। इतना ही नहीं यह कंपनी हर सप्ताह 1 से 2 टन सोना इसी बंकर में रख रही है। इसके अलावा दुनिया भर के निवेशकों में सोना खरीदने होड़ मची हुई है। 

बंकरों में रखा जा रहा सोना


बता दें कि स्विट्जरलैंड में करीब 3,70,000 पुराने परमाणु बंकर मौजूद हैं। ये शीत युद्ध के दौर के हैं। अब इनमें से ज्यादातर बंकर बेकार पड़े हैं। इन्हीं में से एक बंकर की चर्चा खूब हो रही है। यह होश उड़ा देने वाली जानकारी है। इस बंकर में हर सप्ताह एक टन से ज्यादा सोना पहुंचाया जा रहा है। यह हाई-सिक्योरिटी वॉल्ट क्रिप्टो वर्ल्ड की दिग्गज कंपनी टेथर होल्डिंग्स एसए के कंट्रोल में है। बैंकों और सरकारों को छोड़ दें तो यह दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात निजी गोल्ड भंडार माना जा रहा है। 

बंकरों में सुरक्षा के इंतजाम

जानकारों का मानना है कि सुरक्षा के लिहाज से कंपनी ने स्विट्जरलैंड के पुराने परमाणु बंकर में सोना रखा है। इन बंकरों में मोटे स्टील के दरवाजों की कई परतों में जबरदस्त सिक्योरिटी है। कंपनी के सीईओ इसे मजाकिया अंदाज में जेम्स बॉन्ड जैसी जगह बताया है। इस सोने की जमाखोरी की पीछ की असली वजह निवेशकों का सरकारों से उठता भरोसा है। भारी संख्या में निवेशक इस कपनी के जरिए सोना खरीदकर उसे सुरक्षित रख रहे हैं। बता दें कि सरकारें जब लगातार कर्ज बढ़ाती हैं और खर्च पूरा करने के लिए ज्यादा पैसा छापती हैं, तो आम निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। उन्हें डर रहता है कि इससे महंगाई बढ़ेगी, मुद्रा की कीमत गिरेगी और उनकी बचत घट जाएगी। यही सोच क्रिप्टो निवेशकों में भी देखने को मिलती है। ये पारंपरिक बैंकिंग और सरकारी सिस्टम पर कम भरोसा करते हैं। भरोसा कम होने के बाद निवेशक अपनी पूंजी को ऐसी संपत्ति में लगाने लगे हैं, जो सरकार के फैसलों से कम प्रभावित हो। सोना इसी वजह से सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
मांग-आपूर्ति का खेल

आर्थिक जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे बड़ी संख्या में निवेशक सोना खरीदने लगे, उसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी। इससे कीमतें ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गईं। पहली बार सोने का भाव 5,200डॉलर प्रति औंस के पार चला गया। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश की भूख बहुत तेज हो चुकी है। आसान शब्दों में कहें तो जब कोई संस्था लगातार टनों के हिसाब से सोना खरीदती है, तो बाजार में उपलब्ध मात्रा घट जाती है। इससे दाम ऊपर चले जाते हैं। इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने की कीमतों में आई इस बड़ी उछाल के पीछे टेथर की सक्रिय खरीदारी भी एक महत्वपूर्ण कारण है।  ब्लूमबर्ग को दिए गए एक इंटरव्यू में टेथर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पाओलो अर्दोइनो ने कंपनी की तुलना केंद्रीय बैंक से की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भविष्य में डॉलर के मुकाबले सोने से समर्थित नई करेंसी पेश कर सकते हैं। ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार कंपनी ने पिछले वर्ष लगभग 70 टन से अधिक सोना खरीदा है। अर्दोइनो के अनुसार, टेथर के पास फिलहाल करीब 140 टन सोना मौजूद है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 24 अरब डॉलर है। यह बैंकों और केंद्रीय बैंकों को छोड़कर सबसे बड़ा ज्ञात भंडार माना जा रहा है।