अंटार्कटिका के नीचे नई दुनिया, नजारा देख वैज्ञानिक भी हैरान

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने खास तकनीक से अंटार्कटिका की मोटी बर्फ की चादर के नीचे छिपी नई दुनिया का साफ नक्शा तैयार किया है। इससे बर्फ के नीचे दबी हुई बनावटों का पता चला है। विशाल बर्फ के नीचे पहाड़, गहरी घाटियां, झीलें और मैदान छिपे हुए हैं। यह इलाका लगभग 1.4 करोड़ वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां बर्फ के नीचे मछलियों का एक पूरा गुप्त शहर भी मिला है।
बर्फ की गहराइयों में छिपे रहस्य

अंतरिक्ष, समुद्र की गहराइयों और पृथ्वी के भू-गर्भ की तरह ही अंटार्कटिका  के भीतर कई राज छिपे हुए हैं। यह इलाका हमेशा से रहस्यों से भरा रहा है। बर्फ की मोटी परत के नीचे क्या छिपा है, इसकी चर्चा सदियों से होती रही है। अब वैज्ञानिकों ने यहां एक ऐसी खोज की है, जिसने सबको स्तब्ध कर दिया है। वैज्ञानिकों ने खास तकनीक के जरिए मोटी बर्फ के नीचे छिपी नई दुनिया का रहस्य उजागर किया है। साइंस पत्रिका में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस विशाल बर्फ के नीचे पहाड़, गहरी घाटियां, झीलें और मैदान छिपे हुए हैं। बता दें कि जैसे-जैसे दुनिया का तापमान बढ़ रहा है वैसे ही अंटार्कटिका की प्रकृति भी बदल रही है। यह बात अलग है कि अंटार्कटिका में बदलाव शुरू हो गए हैं, लेकिन वहां खेती करने या इंसानों के रहने लायक माहौल बनने के लिए धरती के जलवायु में बहुत बड़ा बदलाव आना बाकी है।
बर्फ के नीचे मछलियों का गुप्त शहर 

वैज्ञानिकों को खोज के दौरान यहां बर्फ के नीचे मछलियों का एक पूरा गुप्त शहर मिला है। यह खोज एक प्रसिद्ध जहाज के मलबे की तलाश के दौरान हुई। अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे हजारों छोटी पोलर मछलियों ने घोंसले बनाए हैं। ये किसी सीक्रेट शहर जैसा है। ये घोंसले इतने व्यवस्थित और सुनियोजित हैं कि लगता है जैसे कोई प्लान्ड कॉलोनी या शहर है। प्रत्येक घोंसला छोटे-छोटे पत्थरों और बर्फ से बना है। यहां मछलियां अपने अंडे सुरक्षित रखती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये घोंसले लाखों साल पुराने हैं। यह कठोर ठंड में जीवित रहने के लिए अनोखी रणनीति हैं। खोज के दौरान ये घोंसले एक-दूसरे से जुड़े हुए पाए गए। यह एक बड़े नेटवर्क जैसा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह अब तक की सबसे बड़ी ज्ञात अंडरवॉटर फिश कॉलोनी है। मछलियां यहां अंडे देती हैं, उन्हें गार्ड करती हैं और शिकारियों से बचाती हैं।
समुद्री जीवन पर नई रोशनी 

यह खोज गोंडवाना महाद्वीप के प्राचीन समुद्री जीवन पर नई रोशनी डालती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मछलियां ठंड में जीवित रहने के लिए एंटीफ्रीज प्रोटीन बनाती हैं। घोंसले बनाने के लिए वे पत्थर इकट्ठा करती हैं और उन्हें व्यवस्थित रूप से रखती हैं। यह व्यवहार इतना जटिल है कि वैज्ञानिकों ने इसे कुदरत का करिश्मा बता दिया। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह नजारा अब तक नहीं देखा गया था। अंटार्कटिका की बर्फ पिघलने के बाद ऐसी और खोजें हो सकती हैं।