भारत ने बनाया मिसाइल इंजन, अब क्रूज मिसाइलें बनाने में आएगी तेजी

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। बीएटीएल ने लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए स्वदेशी इंजन बनाकर पहली खेप जीटीआरई को सौंप दी है। इस स्मॉल टर्बोफैन इंजन का नाम माणिक रखा गया है।

मिसाइल टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता

ईरान जंग के बीच जहां दुनिया पांचवी और छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की ताकत दिखाने में लगी है, वहीं भारत ने चुपचाप मिसाइल टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता हासिल कर ली है। रक्षा विशेषज्ञ इसे गेमचेंजर बता रहे हैं। इससे भारत अब लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों को विकसित करने के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहेगा। इससे डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को नई ताकत मिलेगी। बता दें कि भारत रक्षा क्षेत्र में चौतरफा विकास कर रहा है। डिफेंस सेक्टर में अब केवल आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है। फाइटर जेट से लेकर एयर डिफेंस सिस्टम, आर्टिलरी, तोप-टैंक आदि के क्षेत्र में भारत लगातार प्रगति कर रहा है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अग्नि सीरीज इसकी मिसाल है। कुछ सप्ताह पहले ही भारत ने सबमरीन से लॉन्च होने वाली लंबी दूरी की मिसाइल की सफल लांचिंग की थी। अब देसी मिसाइल के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई गई है। 
लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का विकास


ब्रह्मोस एयरोस्पेस की ईकाई ब्रह्मोस एयरोस्पेस तिरुवनंतपुरम लिमिटेड (बीएटीएल) ने माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन की पहली खेप सफलतापूर्वक जीटीआरई को सौंप दी है। बतों कि जीटीआरई का पूरा नाम गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान है। अब इस इंजन के जरिए बेरोकटोक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का विकास किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार बीएटीएल कुल 25 इंजनों के आॅर्डर मिले थे। अब तक 8 माणिक इंजन सौंप दिए हैं। यह उपलब्धि भारत के इंडिजिनस टेक्नोलॉजी क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के तहत प्रोपल्शन सिस्टम के पूर्ण स्वदेशीकरण की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। माणिक इंजन के विकसित होने से भारत को अब विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे उसकी सामरिक स्वायत्तता और मजबूती बढ़ेगी। बता दें कि अब तक भारत अपनी निर्भय क्रूज मिसाइल के लिए रूस के इंजन पर निर्भर था, लेकिन माणिक इंजन के आने से यह निर्भरता खत्म हो जाएगी। यह बदलाव न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि भविष्य के रक्षा कार्यक्रमों के लिए भी मजबूत आधार तैयार करेगा।
 पाइरोटेक्निक मिड-एयर स्टार्ट क्षमता

इस इंजन की सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें पाइरोटेक्निक मिड-एयर स्टार्ट क्षमता है। इसका मतलब है कि मिसाइल लॉन्च होने के बाद हवा में ही इंजन को विश्वसनीय तरीके से शुरू किया जा सकता है। यह फीचर युद्ध के दौरान क्रूज मिसाइलों के आॅपरेशन में बेहद अहम भूमिका निभाएगा। इससे मिशन की सफलता की संभावना शत प्रतिशत हो जाएगी। बता दें कि  छोटे आकार के इंजन बनाने में हाई-लेवल प्रिसीजन की जटिलता होती है। इसके चलते उत्पादन दर को नियंत्रित रखा गया है। आने वाले समय में इसमें तेजी देखने को मिलेगी। केरल सरकार ने तिरुवनंतपुरम के पास नेट्टुकलथेरी में इस इंजन को बनाने के विस्तार के लिए 180 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस नए प्लांट के स्थापित होने से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही भविष्य की मिसाइल परियोजनाओं को भी गति मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि माणिक इंजन का सफल विकास भारत के मिसाइल कार्यक्रम के लिए गेमचेंजर साबित होगा।