नयी दिल्ली, एजेंसी। सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को भारतीय सेना के मिशन ओलंपिक विंग की पदक विजेता खिलाड़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रशंसा की और कहा कि एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करके उन्होंने दिखा दिया है कि वे लॉस एंजिलिस में 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में अपना जलवा बिखेरने के लिए तैयार हैं। भारतीय सेना ने यहां मानेकशॉ सेंटर में एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले अपने खिलाड़ियों को सम्मानित किया। सेना के खिलाड़ियों ने आइची-नागोया खेलों में कुल 20 पदक जीते, जिनमें छह स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक शामिल हैं। सेठ ने अभिनंदन समारोह के बाद अपने संबोधन में कहा, ‘‘मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जहां तक सेना का सवाल है तो हमने मिशन ओलंपिक विंग के जरिए देश भर में कई खेल केंद्र सक्रिय रूप से स्थापित किए हैं।
हमारे पास खेलों में लड़कों और लड़कियों की कंपनियां हैं। हम प्रत्येक प्रमुख चैंपियनशिप के लिए नए खिलाड़ी तैयार करेंगे और उन्हें देश के लिए खेलने के अवसर प्रदान करेंगे।’’ सेना के मिशन ओलंपिक विंग की स्थापना 2001 में की गई थी। मिशन ओलंपिक विंग में पांच केंद्र रोइंग नोड, निशानेबाजी नोड, घुड़सवारी नोड, सेलिंग नोड और सेना खेल संस्थान (एएसआई) हैं। सेनाध्यक्ष ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि आगामी ओलंपिक खेलों में हमारे खिलाड़ियों में से कई पोडियम पर जगह बनाएंगे तथा 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में हमारे देश के लिए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतेंगे।’’ एशियाई खेलों में सेना से जुड़े खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा। लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने दो रजत पदक (1500 मीटर और 10,000 मीटर) और एक कांस्य पदक (5000 मीटर) जीता। ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा (व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्वर्ण, महिला टीम रजत) और मैराथन धावक सावन बरवाल ने रजत पदक जीता। सेठ ने कहा, ‘‘हम सभी देशवासियों का यह कर्तव्य है कि हम इन खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते रहें क्योंकि हर बार जीतना संभव नहीं होता। मैं यह नहीं कहूंगा कि प्रतियोगिता में केवल भाग लेना ही काफी है। भाग लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन भाग लेने के साथ-साथ पदक जीतना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं फिर से यह कह रहा हूं कि हम उन्हें प्रोत्साहित करते रहेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि वह अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से न केवल भारतीय सेना का गौरव बढ़ाएंगे बल्कि विश्व मंच पर भारत का झंडा और भी ऊंचा उठाएंगे।’’ ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा ने कहा कि भारतीय सेना में शामिल होने से उन्हें एक खिलाड़ी के रूप में बेहतर बनने में मदद मिली। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले साल ही भारतीय सेना में भर्ती हुई थी और अब तक का अनुभव शानदार रहा है। एक खिलाड़ी और व्यक्ति के रूप में भी हम इस तरह का अनुभव लेना चाहते हैं। इस तरह के कार्यक्रम से काफी सीख मिलती है। हम हर चीज से सीखते हैं और खेल हमें बहुत कुछ सिखाता है।’’





