जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। विपक्ष के विरोध और चुनाव आयोग को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। एक ओर जहां संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं ने पहली बार एक के बाद विपक्षी आंदोलन पर सवाल खड़े किए।
मोदी सरकार की रणनीति
एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर चल रहे विपक्षी आंदोलन के खिलाफ मोदी सरकार ने रणनीति तैयार कर ली है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इसमें परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक लाए जा सकते हैं। सत्र बुलाने की संभावना तलाशने के लिए सरकार ने डीएमके से संपर्क साधा है। इससे सियासी हलचल बढ़ गई है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इससे जुड़े संविधान संशोधन बिल के प्रावधानों पर मंथन के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। बता दें कि खरगे की ओर से मोदी को पत्र लिखने से विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलों को बल मिला है। विशेष सत्र से संबंधित सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि जब तक सत्रावसान नहीं हो जाता, तब तक विशेष सत्र का विकल्प खुला है। संभावना जताई जा रही है कि संविधान सदन में 26 से 27 अक्टूबर को ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन होना है। ऐसे में विशेष सत्र इसके आयोजन के तत्काल बाद बुलाया जा सकता है।
सत्तापक्ष और विपक्ष में घमासान तेज
दूसरी ओर एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में घमासान तेज हो गया है। निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर विरोध-प्रदर्शन करने पर गिरफ्तार हुए अभिजीत दिपके को आज स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट एसईएम के सामने पेश किया जाएगा। इसके चलते मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य इलाकों में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में 150 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने बताया कि बार-बार घोषणाएं करने के बावजूद कनॉट प्लेस के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। दूसरी ओर पुलिस की इस कार्रवाई पर ममता बनर्जी ने सवाल उठाया। इसी तरह कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि पुलिस हड्डियां तोड़ सकती है, लेकिन सत्याग्रह नहीं तोड़ सकती। बता दें कि राहुल ने यह बात उन छात्रों से मुलाकात के बाद कही जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
आंदोलन पर सत्तापक्ष हमलावर
दूसरी ओर विपक्ष के आंदोलन पर अब सत्तापक्ष भी हमलावर हो गया है। प्रशांत भूषण और कांग्रेस के रिजीम चेंज यानी तख्तापलट या सत्ता परिवर्तन वाले बयान पर भाजपा नेताओं ने जमकर निशाना साधा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सत्ता परिवर्तन के दावे को लेकर विपक्ष और इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अराजकता से सत्ता हासिल करना चाहती है। देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति में मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की कोशिशें हो रही हैं। कुछ लोग बांग्लादेश की घटनाओं की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। कांग्रेस के नेता खुलेआम स्वीकार करते हैं कि उन्हें बांग्लादेश के हालात से प्रेरणा मिली है। वहीं कुछ अन्य लोग बेशर्मी से सरकार को गिराने की मांग कर रहे हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि झूठा आक्रोश दिखाकर, संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करके और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए भारत की विकास यात्रा को प्रभावित नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी को बाधा डालने वाली राजनीति करने के बजाय, जनादेश का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्म-चिंतन करना चाहिए।
किरेन रिजिजू का पलटवार
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रिजीम चेंज की वकालत करने वालों पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि प्यारे देशभक्त भारतीयों, याद रखो अपने दुश्मनों को एक बार माफ करो, दोस्तों को दो बार, लेकिन गद्दारों को कभी नहीं। बता दें कि केंद्रीय मंत्री ने प्रशांत भूषण की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो शेयर किया, जिसमें वरिष्ठ वकील ने खुलेआम रिजीम चेंज की मांग को स्वीकार किया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भूषण ने कहा था कि हां, हम रिजीम चेंज चाहते हैं। इसी तरह दिल्ली में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने रिजीम चेंज और सरकार बदलने के बीच अंतर समझाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता का समर्थन घटने और राजनीतिक सफलता की संभावना कम होने के कारण विपक्ष की ओर से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के जरिए सरकार बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं साजिश और हिंसक संघर्ष के जरिए सरकार गिराने की कोशिश को रिजीम चेंज कहा जाता है।





