वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी, धरती से टकराएगा सेटेलाइट

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। एस्टरॉयड्स को लेकर नासा अक्सर अलर्ट जारी करता रहता है। अबउसने किसी चट्टान या पथरीले उल्कापिंड को लेकर नहीं बल्कि खुद की सेटेलाइट को लेकर चेतावनी जारी की है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार आज 600 किलो की यह आफत धरती से टकरागी। यह किस देश या शहर पर गिरेगी यह कहना मुश्किल है।
एस्टरॉयड्स को लेकर आती है चेतावनी

एस्टरॉयड्स को लेकर हम अक्सर अंतरिक्ष एजेंसियों की चेतावनी सुनते आए हैं। ये उल्कापिंड लाखों किलोमीटर प्रतिसेकेंड की रफ्तार से चलते हैं। इनका पृथ्वी के बहुत नजदीक आना खतरनाक माना जाता है। अब इस आफत को छोड़ नासा ने नई मुश्किल को लेकर चेतावनी जारी की है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार उनका खुद का 600 किलो वजन वाला एक सैटेलाइट आज धरती पर क्रैश होने जा रहा है। ये सैटेलाइट करीब 14 सालों से आॅर्बिट में था। समय पूरा होने के बाद यह सैटेलाइट धरती से टकराकर क्रैश होने जा रहा है। नासा ने इसका वजन 1323 पाउंड यानि करीब 600 किलोग्राम बताया है। बता दें कि इसे अगस्त 2012 में अपने ट्विन, वैन एलन प्रोब बी के साथ धरती के चारों ओर रेडिएशन बेल्ट की स्टडी करने के लिए लॉन्च किया गया था। इस सैटेलाइट का नाम वैन एलन प्रोब ए है।

2019 में डीएक्टिवेट हुए थे स्पेसक्राफ्ट 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार ये दोनों ही स्पेसक्राफ्ट 2019 के मध्य में डीएक्टिवेट हो गए थे। वैज्ञानिकों के अनुसार वैन एलन प्रोब बी का धरती से बाहर का समय अब लगभग खत्म हो चुका है। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इसकी स्थिति पर अपडेट जारी करते हुए बताया कि यह 9 मार्च को अपनी अंतरिक्ष की कक्षा से रवाना हुआ था। अनुमान है कि यह 10 मार्च यानी आज की रात वायुमंडल में प्रवेश करेगा। अगर भारतीय समय के अनुसार इसकी गणना की जाए तो बुधवार तड़के 11 मार्च को धरती से टकराएगा। वैज्ञानिकों ने इसमें 24 घंटे की विंडो रखी है। यानी इसके पृथ्वी से टकराने का समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। नासा को उम्मीद है कि वायुमंडल में पहुंचते ही इसमें भयानक विस्फोट हो सकता है। यह किसी बड़े एटम बम जैसा हो सकता है। वैज्ञानिक इसे समुद्र की ओर ले जाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि इस खतरे को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों  का पूरा प्रयास है कि यह किसी शहर या उसके आस-पास न गिरे। अगर यह किसी शहर पर गिरेगा तो मुश्किल हो सकती है। नासा ने कहा है कि अभी यह तय नहीं है कि यह ठीक किस जगह गिरेगा क्योंकि तेज रफ्तार की वजह से इसकी सटीक लोकेशन बताना मुश्किल है। नासा के अधिकारी सैटेलाइट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
रेडिएशन बेल्ट्स की जांच था काम

इन सैटेलाइट्स का असली काम रेडिएशन बेल्ट्स की जांच करना था। ये वैन एलन बेल्ट में थे। बात दें कि एलन बेल्ट पृथ्वी के चारों तरफ ऊर्जा से भरे कणों की दो बड़ी परतें होती हैं। ये जगह अंडाकार मानी जाती है। ये सैटेलाइट्स बार-बार इन रेडिएशन परतों के अंदर जाते और बाहर आते थे। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि अंतरिक्ष का मौसम और सूरज से आने वाली किरणें हमारी पृथ्वी को कैसे प्रभावित करती हैं। शुरुआत में इनका नाम विकिरण बेल्ट तूफान जांच सेटेलाइट रखा गया था। इनका काम अंतरिक्ष में आने वाले सौर तूफानों और रेडिएशन को लेकर स्टडी करना था। बाद में इन परतों की खोज करने वाले वैज्ञानिक जेम्स वैन एलन के सम्मान में इनका नाम बदलकर वैन एलन प्रोब्स कर दिया गया।