अब अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाएगा भारत, लांच किया सैटेलाइट 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारत भी अब अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाएगा। यह काम 2028 में पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आज भारत पहला आॅर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट लांच करने जा रहा है। इस कवायद के सफल होने पर भारत अंतरिक्ष में ही डाटा प्रोसेस करने वाले चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा। 
अंतरिक्ष में नई संभावनाएंदुनियाभर के देश अंतरिक्ष में नई संभावनाओं को देख रहे हैं, जिनमें डेटा सेंटरों का निर्माण सबसे प्रमुख है। गूगल एक मिशन रवाना कर रहा है। जिसके तहत टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने की तैयारी है। अब भारत ने भी इस दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कैलिफोर्निया के वांडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से भारत आज अपना पहला आॅर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट लांच करेगा। इससे भारत अब अंतरिक्ष में ही डाटा प्रोसेस करने वाले अमेरिका, चीन, जापान जैसे चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा। 
हवा में रहते हुए डाटा प्रोसेस 


भारत की तरफ से लांच होने वाला यह सैटेलाइट हवा में रहते हुए ही डाटा को प्रोसेस कर लेगा। यह सिर्फ काम की सटीक सूचना ही भेजेगा, जिससे भारत अपनी रणनीति अंतरिक्ष में ही तैयार कर लेगा। हैदराबाद स्थित भारतीय स्पेस स्टार्टअप टेक मी2 स्पेस के एमओआई-1ए सैटेलाइट की लांचिंग स्पेसएक्स के रॉकेट से होगी। इस सैटेलाइट में एनवीडिया जैसे ताकतवर एज-कंप्यूटिंग प्रोसेसर औरएआई चिप्स लगाए गए हैं। यह अंतरिक्ष में ही सुपर-फास्ट कंप्यूटिंग पावर के साथ डाटा प्रोसेस में सक्षम है।  अब तक स्पेस-बेस्ड क्लाउड डाटा सेंटर और इन-आर्बिट प्रोसेसिंग की तकनीक पर मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियां स्पेसएक्स या चीन और जापान की सरकारी एजेंसियां ही काम कर रही थीं। इस सफल लांचिंग के साथ भारत भी अंतरिक्ष में अपना डाटा सेंटर बनाने वाले देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा।  

इस सैटेलाइट की सफल लांचिंग से भारत को कई फायदे होंगे। इससे किसानों को सटीक पूवार्नुमान मिलने से फसलों को जोखिम कम होगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा किसी आपदा के आने से पहले ही भारतीय अंतरिक्ष केंद्र को पूरी जानकारी मिल जाएगी। नया एआई सैटेलाइट आपदा की तस्वीरों का त्वरित विश्लेषण कर ग्राउंड स्टेशन को सटीक जानकारी देगा और तुरंत बचाव कार्य शुरू होगा।  यह सेटेलाइट देश की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र में घूम रहे दुश्मन के जहाजों या सीमाओं पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की लाखों तस्वीरें भेजने के बजाय, एआई सैटेलाइट केवल उन तस्वीरों को फिल्टर करके भारतीय सेना को भेजेगा जिनमें असल खतरा छिपा है। यह समुद्र में जहाजों के रूट को आसान बनाने और तूफानों की सटीक जानकारी देकर व्यापार सुगम बनाएगा। यह सेटेलाइट देश के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। शहरों में अचानक बढ़ रहे अवैध कब्जों या जंगलों की कटाई का सटीक डाटा स्थानीय प्रशासन को मिलेगा।  यह सैटेलाइट कंटेनराइज्ड एआई तकनीक पर काम करेगा। यह मोबाइल एप्स की तरह सॉफ्टवेयर को छोटे-छोटे सुरक्षित कंटेनर्स में बंद कर देता है। जैसे मोबाइल में हम अपने फोन में जरूरत के हिसाब से नया ऐप डाउनलोड या अपडेट कर लेते हैं, ठीक वैसे ही वैज्ञानिक जमीन पर बैठे-बैठे अंतरिक्ष में तैर रहे सैटेलाइट के अंदर नए एआई मॉडल्स को कंटेनर्स में भेज सकते हैं। इस सैटेलाइट में लगे एनवीडिया ओरिन जैसे पावरफुल मिनी-कंप्यूटर और एआई चिप अंतरिक्ष में वैसे ही डाटा प्रोसेस करेंगे, जैसे धरती पर मौजूद बड़े-बड़े डेटा सेंटर करते हैं। जब सैटेलाइट को भारी-भरकम कच्चे डेटा को धरती पर डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा, तो इंटरनेट बैंडविड्थ और भारी डाउनलोडिंग कॉस्ट की भी बचत होगी। इसस कई अहम क्षेत्रों में रियल-टाइम में फैसले लेना संभव होगा।