जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक माह से भी ज्यादा दिनों तक चले युद्ध के बाद दो सप्ताह के लिए हुए सीजफायर के बाद पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। दरअसल, 34 किमी चौथे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवा हिस्सा यहीं से गुजरता है। 28 फरवरी से शुरू हुआ यह युद्ध सात अप्रैल तक चला। 10 सूत्रीय सीजफायर में बताया जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ओमान और तेहरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूल सकते हैं।

बता दें कि अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग माना जाता था। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच हुए सीजफायर के बाद अगर यह शर्त रखी गई है तो ओमान और तेहरान को बड़ा फायदा मिलेगा। अगर ऐसा होता है कि यह अंतर्राष्ट्रीय मार्ग नहीं रह जाएगा। चूंकि, अभी तक इसे अंतर्राष्ट्रीय मार्ग माना जाता था। यहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था।

बता दें कि होर्मुज संकरा होने के साथ ही व्यापार के लिए मुख्य मार्ग है। खासकर तेल व्यापार का यहां से पूरी दुनिया का करीब 5 प्रतिशत व्यापार होता है। ऐसे में यहां से गुजरने वाले जहाजों से अगर वसूली होती है तो ओमान को बड़ा फायदा होगा। ऐसी खबरें हैं कि इस बारे में ओमान और ईरान के बीच सहमति भी बन चुकी है। गौरतलब है कि युद्ध के चलते तेल की कीमतें आसमान पर थीं। आज सीजफायर की खबर आते ही तेल के दामों में कमी आई है साथ ही शेयर मार्केट में भी उछाल आया है। 14 दिनों के लिए सीजफायर की खबर ने राहत तो दी लेकिन अगर दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध शुरू हुआ तो हालात फिर बिगड़ेंगे।





