जन प्रवाद, ब्यूरो।
प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता एवं प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक राजा भैया को कौन नहीं जानता, लेकिन अब राजा भैया नहीं बल्कि उनकी बेटी राघवी कुमारी चर्चा में हैं। दरअसल, उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से संबंधित विवादों में खुलकर हस्तक्षेप किया है। उन्होंने न केवल शंकराचार्य का प्रबल समर्थन किया, अपितु इस प्रकरण को सनातन परंपरा को दुर्बल करने के लिए रची गई गहन षड्यंत्रात्मक योजना करार दिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई से पूर्व राघवी ने स्पष्ट कहा कि शंकराचार्य का पद किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, यह चार वेदों की जीवित परंपरा का सर्वोच्च आध्यात्मिक आसन है।

गंभीर आरोपों से उपजा विवाद
इस बीच शंकराचार्य पर गम्भीर अभियोग लगाए गए हैं। दो किशोरों ने उनसे सम्बद्ध एक ब्रह्मचारी पर यौन शोषण का आरोप लगाया, जिसके पश्चात न्यायालय के निर्देश पर गत रविवार प्रयागराज में शंकराचार्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। मामला तीव्रता से मीडिया की सुर्खियों में आया और अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। शुक्रवार को अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।
आस्था पर चोट का आरोप
राघवी ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि शंकराचार्य का पद किसी संप्रदाय अथवा संस्था का मात्र प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि यह सम्पूर्ण सनातन समाज की पहचान है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस पद को विवादित करना करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर प्रत्यक्ष आघात है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न
माघ मेले के दौरान उत्पन्न तनाव तथा पुलिस द्वारा शंकराचार्य से की गई पूछताछ पर राघवी ने राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्न उठाए। उनके अनुसार ‘राज्य की जिम्मेदारी केवल विधि-व्यवस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान और सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी शासन का अनिवार्य कर्तव्य है।’ उन्होंने इसे किसी व्यक्ति पर लगाया गया तथाकथित आरोप न मानकर आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्ठित सनातन आध्यात्मिक परंपरा को दुर्बल करने का प्रयास बताया।
परंपरा को बदनाम करने की कोशिश
राघवी ने अपने पोस्ट में तीक्ष्ण शब्दों का प्रयोग करते हुए लिखा कि सदियों से वेदों की ज्योति प्रज्ज्वलित करने वाली इस महान परंपरा को कलंकित करने के सभी प्रयास पूर्व में निष्फल रहे हैं और भविष्य में भी निष्फल रहेंगे। उन्होंने कहा कि आस्था पर आधारित आरोप स्वीकार्य नहीं हो सकते और अंतत: सत्य की ही विजय होगी। न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ किया।

क्यों चर्चा में है राघवी का रुख?
जनता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पुत्री राघवी सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय रहती हैं। अनेक प्रसंगों में वह मुखर रही हैं। पारिवारिक विवादों में भी उन्होंने अपनी माता की ओर से सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाला। राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर उन्हें एक सजग युवा के रूप में देखा जा रहा है। शंकराचार्य के विरुद्ध हिंदू समाज में उत्पन्न ध्रुवीकरण के समय राघवी का यह वक्तव्य स्पष्ट करता है कि यह मामला केवल विधिक नहीं है, बल्कि सामाजिक एवं राजनीतिक विमर्श का भी अभिन्न अंग बन चुका है।





