134 जहाजों का मिला मलबा, 5वीं सदी के पुराने जहाज भी शामिल

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। जिब्राल्टर की खाड़ी में 10-20 नहीं बल्कि 134 जहाजों का कब्रिस्तान मिला है। यानी सैंकड़ों साल पहले ये जहाज अपनी यात्रा के दौरान समुद्र में डूब गए थे। यह सिर्फ जहाजों की खोज नहीं है बल्कि यह इतिहास के उन पन्नों की जानकारी है जिससे पूरी दुनिया आज तक अनजान थी।
स्पेन के आर्कियोलॉजिस्ट्स ने की खोज 


समुद्र के भीतर स्पेन के आर्कियोलॉजिस्ट्स ने बड़ी खोज की है। इस खोज ने इतिहासकारों को दोबारा पन्नों को पलटने पर मजबूर कर दिया है। यह पूरा मामला अल्जेसिरस के बंदरगाह का है। यहां रॉक आॅफ जिब्राल्टर के बीच फैली खाड़ी में प्राचीन जहाजों का एक विशाल जखीरा मिला है। इस प्रोजेक्ट के तहत शोधकर्ताओं ने 5वीं सदी ईसा पूर्व से लेकर दूसरे विश्व युद्ध तक के 134 जहाजों के मलबे का दस्तावेजीकरण किया है। बता दें कि जिब्राल्टर जलडमरूमध्य को स्ट्रेट आॅफ जिब्राल्टर भी कहा जाता है। यह इलाका हमेशा से यूरोप और अफ्रीका के बीच एक अहम कड़ी रहा है। हजारों सालों से इस रास्ते से व्यापार हुआ करता था। यह इलाका खतरनाक भी माना जाता था। इस रास्ते ने फोनीशियन और रोमन जहाजों से लेकर ब्रिटिश और डच जहाजों तक को अपनी लहरों में डुबोया है। यूनिवर्सिटी आॅफ काडिज के नेतृत्व में चले इस तीन साल के प्रोजेक्ट ने अब तक कुल 151 ऐतिहासिक स्थलों की पहचान की गई है। इनमें 134 ऐसे स्थान हैं, जहां जहाज डूबे हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यह खोज केवल लकड़ी और लोहे के मलबे की नहीं है, बल्कि यह व्यापार और युद्ध की उन कहानियों का सबूत है जो सदियों से समुद्र के नीचे दफन थीं।
विश्व युद्ध तक की खोज

तीन साल लंबे प्रोजेक्ट में 5वीं सदी ईसा पूर्व से लेकर दूसरे विश्व युद्ध तक के 134 डूबे हुए जहाज मिले हैं। इनमें फोनीशियन, रोमन, ब्रिटिश और स्पेनिश जहाज शामिल हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार इन खोजों में केवल जहाज नहीं बल्कि 1930 के दशक के एक विमान का इंजन और प्रोपेलर भी मिला है। बता दें कि यह इलाका हमेशा से एक बड़ा व्यापारिक मार्ग रहा है। ऐसे में यहां से हर जहाज को गुजरना ही पड़ता था। इस रास्ते व्यापारिक जहाजों के अलावा युद्धक जहाज भी गुजरते थे। यहां अलग-अलग संस्कृतियों और देशों के जहाजों का मिलना इस जगह की रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसमें सबसे बड़ी रोमांचक खोज तीन मध्यकालीन जहाज हैं। ये जहाज उस दौर के बताए जा रहे हैं जब दक्षिणी स्पेन में इस्लामिक शासन का आखिरी समय चल रहा था। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट के दौरान 18वीं सदी की एक छोटी स्पेनिश गनबोट पुएंते मेयोर्गा का भी मलबा मिला है। यह गनबोट उस समय ब्रिटिश जहाजों पर अचानक हमला करने के लिए जानी जाती थी। ये नावें अक्सर खुद को मछली पकड़ने वाली नावों के रूप में छिपा लेती थीं। यह मौका आने पर अचानक दुश्मन पर हमला कर देती थीं।
समुद्री यात्राओं और तकनीक

इन जहाजों के जरिए उस समय की समुद्री यात्राओं और तकनीक के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है। रिसर्चर्स का मानना है कि ये मलबे हमें उस समय के समाज और उनके समंदर से जुड़ाव को समझने में मदद करेंगे।  इतनी बड़ी खोज के बाद अब वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे बचाने की है। पोर्ट डेवलपमेंट, ड्रेजिंग और डॉक निर्माण जैसी गतिविधियों से इन ऐतिहासिक स्थलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। क्लाइमेट चेंज भी एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर मिट्टी की परतों को बदल रहा है, जिससे ये प्राचीन अवशेष नष्ट होते जा रहे हैं। इसके साथ ही एक खास तरह की समुद्री शैवाल यानी इनवेसिव एल्गी भी इन मलबों पर तेजी से फैल रही है। इसको बचान के लिए प्रोफेसर सेरेजो ने स्पेन की सरकार से इन साइट्स को सुरक्षित घोषित करने की अपील की है।