ब्लैक होल निकला डार्क मैटर का गोला, पुरानी थ्योरी हुई फेल, वैज्ञानिक भी हैरान

नए अध्ययन ने सभी को किया हैरान
ब्लैक होल पर किए गए नए अध्ययन ने सभी को हैरान कर दिया। इस नए शोध ने ब्रह्मांड से लेकर ब्लैकहोल की उत्पत्ति तक की सभी पुरानी थ्योरी को झूठा साबित कर दिया है। शोध के अनुसार हमारी आकाशगंगा के केंद्र में जिसे सुपरमैसिव ब्लैक होल माना जा रहा था, वह डार्क मैटर का एक सघन पिंड या गोला निकला। यह जानकारी वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
आकाशगंगा के केंद्र में एक बहुत बड़ा ब्लैक

आपने विज्ञान की किताबों में पढ़ा होगा कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक बहुत बड़ा ब्लैक होल है। वैज्ञानिक भाषा में इसे सैजिटेरियस कहा जाता है। 2022 में इसकी धुंधली तस्वीर ने इसके मौजूद होने की बात पर मुहर भी लगा दी थी। इस खोज के लिए वैज्ञानिकों को नोबल प्राइज भी मिल चुका है। अब वैज्ञानिकों के एक समूह ने दावा किया है कि हम जिसे ब्लैक होल समझ रहे हैं, वह असल में डार्क मैटर का एक घना गोला है। बता दें कि डार्क मैटर ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। वैज्ञानिक दशकों से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर वह कौन सी चीज है, जो गैलेक्सीज को एक साथ बांधकर रखती है। अब एक नई रिसर्च ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। इस रिसर्च के अनुसार डार्क मैटर कोई नया पार्टिकल नहीं है। यह असल में बिग बैंग से भी पुराने ब्लैक होल्स हो सकते हैं। यानी ये ब्लैक होल्स उस समय के हैं, जब शायद हमारा वर्तमान ब्रह्मांड पैदा भी नहीं हुआ था। यह थ्योरी डार्क मैटर के साथ-साथ ब्रह्मांड की शुरुआत की कहानी को भी पूरी तरह बदल देती है।
बिग बैंग से हुई ब्रह्मांड की शुरुआत

 
अंतरिक्ष वैज्ञानिक यह बात मानते हैं कि ब्रह्मांड की शुरुआत बिग बैंग से हुई थी। 100 साल से कॉस्मोलॉजिस्ट इसी थ्योरी पर काम कर रहे थे। उनके अनुसार अंतरिक्ष में एक भीषण धमाका हुआ था। इसी शून्य से ब्रह्मांड का विस्तार शुरू हुआ। नई रिसर्च कहती है कि शायद बिग बैंग ब्रह्मांड की शुरुआत का आधार नहीं है। बिग बैंग से पहले भी एक ब्रह्मांड मौजूद रहा था। वह ब्रह्मांड पहले सिकुड़ा और फिर एक बेहद घने पॉइंट पर पहुंचने के बाद दोबारा फैलने लगा। इसी फैलने की प्रक्रिया को हम बिग बैंग कहते हैं। इस नजरिए से देखें तो बिग बैंग कोई धमाका नहीं, बल्कि एक बाउंस था। इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिलैटिविस्टिक एस्ट्रोफिजिक्स के रिसर्चर्स की नई थ्योरी के अनुसार गैलेक्सी के बीच में ब्लैक होल नहीं था। यह डार्क मैटर का एक बेहद घना गुच्छा है। बता दें कि डार्क मैटर को ब्रह्मांड का गोंद कहा जाता है। यह रोशनी को सोखता नहीं है और न ही उसे रिफ्लेक्ट करता है। इसे हम देख नहीं सकते, लेकिन इसका गुरुत्वाकर्षण महसूस किया जा सकता है। अगर यह तत्व न हो तो गैलेक्सीज बिखर जाएंगी। ज्यादातर फिजिक्स एक्सपर्ट्स मानते हैं कि डार्क मैटर छोटे सब-एटॉमिक पार्टिकल्स से बना हैं। यह दिखता नहीं है, लेकिन इसका असर हर जगह महसूस होता है। यह गुरुत्वाकर्षण पैदा करता है और चीजों को अपनी तरफ खींच सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर डार्क मैटर बहुत ज्यादा मात्रा में एक जगह इकट्ठा हो जाए, तो वह भी ब्लैक होल जैसी ताकत दिखा सकता है।
बहुत तेज गति से घूमते हैं तारे 
बता दें कि गैलेक्सी के केंद्र के पास कुछ तारे बहुत तेज गति से घूमते हैं।  इस बारे में अब तक माना जा रहा था कि यह तेज रफ्तार सिर्फ ब्लैक होल की वजह से है। अब पता चला कि तारों के घूमने के पीछे डार्क मैटर है। शोधकर्ताओं के अनुसार अगर यह नई थ्योरी सही साबित होती है, तो विज्ञान की दुनिया में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। इसके बाद ब्लैक होल के बारे में हमारी समझ बदल जाएगी। इसके बाद हमें पता चलेगा कि गैलेक्सी कैसे बनती है। साथ ही इस खोज से डार्क मैटर को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।