वैज्ञानिकों ने किया बड़ा कमाल, खतरनाक विस्फोट का वीडियो रिकॉर्ड

जनप्रवाद ब्यूरो टीम। वैज्ञानिकों ने पहली बार मैग्नेटर यानी चुंबकीय तारे में खतरनाक विस्फोट होते हुए देखा। हैरान करने वाली बात यह है कि यह तारा 1 सेकंड में 1000 बार घूमता दिखाई दिया। वैज्ञानिकों को इस तारे की खोज करने में आइंस्टीन की 100 साल पुरानी थ्योरी काम आई है।
शक्तिशाली मैग्नेटर का जन्म


वैज्ञानिकों ने पहली बार एक शक्तिशाली मैग्नेटर के जन्म को सीधे तौर पर देखा है। यह घटना एसएन 2024 एएफएवी नाम के एक सुपरल्युमिनस सुपरनोवा विस्फोट के दौरान दर्ज हुई। इस खोज को पूरा करने के लिए वैज्ञानिकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने करीब एक अरब प्रकाश वर्ष दूर हुई इस घटना को 200 दिनों तक लगातार 27 टेलीस्कोप के नेटवर्क के जरिए देखा। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह सूर्य से लगभग 25 गुना भारी एक तारा विस्फोट के साथ समाप्त हुआ। इस घटना को एसएन 2024 एएफएवी नाम दिया गया। यह पृथ्वी से करीब एक अरब प्रकाश वर्ष दूर हुई। इस विस्फोट को सुपरल्युमिनस सुपरनोवा कहा जाता है। इसका मतलब है कि यह सामान्य सुपरनोवा से कम से कम 10 गुना ज्यादा चमकीला पाया गया। बता दें कि यह तारा हमारे सूर्य से करीब 25 गुना बड़ा था।
27 टेलीस्कोप से खोज

 

इस विस्फोट को वैज्ञानिकों ने करीब 200 दिनों तक लगातार देखा। इसके लिए लास कुम्ब्रेस आब्जर्वेटरी के 27 टेलीस्कोप के वैश्विक नेटवर्क का उपयोग किया गया। इसके अलावा अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत की मदद से यह गुत्थी सुलझाई गई। सुपरनोवा का सबसे चमकीला चरण करीब 50वें दिन देखा गया। सामान्य तौर पर इसके बाद इसकी चमक धीरे-धीरे कम हो जाती है। इस दौरान में वैज्ञानिकों को बहुत कुछ असामान्य दिखाई दिया। इस सुपरनोवा की चमक धीरे धीरे घटने के बजाय कम या ज्यादा होने लगी। यानी इसकी चमक में उतार चढ़ाव देखने को मिला। वैज्ञानिकों ने देखा कि इसकी चमक में चार अलग अलग उभार आए। पहले देखे गए सुपरल्युमिनस सुपरनोवा में आम तौर पर एक या दो उभार ही दिखाई देते थे। इस वजह से वैज्ञानिकों को लगा कि इस विस्फोट के पीछे कोई असाधारण ऊर्जा स्रोत मौजूद है। कई महीनों की गणना और एनालिसिस के बाद वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि इस घटना के पीछे खतरनक मैग्नेटर यानी चुंबकीय शक्ति है। बता दें कि जब कोई बहुत विशाल तारा जो सूर्य से 5 गुना अधिक भारी होता है, वह अपनी उम्र के अंत में सुपरनोवा के रूप में फटता है। उसका कोर ढह जाता है, तो मैग्नेटर का जन्म होता है। यह इतना तीव्र होता है कि यह 1,000 किमी दूर से भी मानव शरीर के अणुओं को नष्ट कर सकता है। मैग्नेटर के तेज होने से ही तारे की कठोर सतह पर दरारें पड़ती हैं। इसे स्टारक्वेक कहते हैं। इससे भारी मात्रा में रेडिएशन निकलता है। 1979 में पहली बार एक गामा-रे बर्स्ट के रूप में इन्हें खोजा गया था।
वैज्ञानिक थ्योरी मजबूत

इस खोज ने 16 साल पहले पेश की गई एक वैज्ञानिक थ्योरी को भी मजबूत किया है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के खगोल भौतिकी विशेषज्ञ डैन कासेन ने 2008 में यह सिद्धांत दिया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि कुछ सुपरल्युमिनस सुपरनोवा की ऊर्जा का स्रोत मैग्नेटर हो सकते हैं। उस समय वैज्ञानिकों के पास इसका सीधा प्रमाण नहीं था। नई रिसर्च में पहली बार इस सिद्धांत को मजबूत सबूत मिले हैं।