दुनिया के सबसे बड़े महासागर को लेकर भविष्यवाणी, समाप्त हो सकता है प्रशांत महासागर

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम पैटर्न को लेकर प्रशांत महासागर की खूब चर्चा हो रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में अल नीनो के सक्रिय होने से दुनिया भर में सूखा, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और मौसम में बड़े बदलाव की आशंका बढ़ गई है। अब वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे बड़े महासागर को सबसे चिंताजनक भविष्यवाणी की है। इस महासागर के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
प्रशांत महासागर पर टिकी निगाहें

दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों की निगाहें एक बार फिर भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर पर टिक गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले समय में एक बार फिर यहां से अल नीनो सक्रिय होगा। साथ ही वैश्विक स्तर पर मौसम में बड़े बदलावों की आशंका बढ़ गई है। इसके प्रभाव से कई क्षेत्रों में सूखा, बाढ़, भीषण गर्मी और तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने प्रशांत महासागर में अल नीनो के विकसित होने की पुष्टि की है। शुरूआती संकेत बताते हैं कि यह हाल के वर्षों के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है।
महासागर को लेकर बढ़ी चिंता

दूसरी ओर दुनिया के इस बड़े महासागर को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ी चिंता जाहिर की है। उनके अनुसार इस महासागर के अस्तित्व को लेकर चिंता है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर तेजी से सिकुड़ रहा है। यहां तक इसके गायब होने की भी संभावना तेज हो गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार इस महासागर के गायब होने के बाद धरती पर नये महाद्वीप अमेसिया का जन्म होगा। प्रशांत महासागर के सिकुड़ने के पीछे टेक्टोनिक प्लेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशांत महासागर जो पृथ्वी की सतह पर मौजूद सबसे बड़ी संरचना है वो धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है। इस बारे में शोधकर्ताओं का मानना है कि यह बात जितनी हैरान करने वाली है उतनी ही चौंकाने वाली भी है। एनओएए ओशन एक्सप्लोरेशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रशांत महासागर 155 मिलियन वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाके में फैला हुआ है। बता दें कि यह धरती पर मौजूद सभी महाद्वीपों और द्वीपों का कुल जमीनी इलाका लगभग 149 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। यह धरती की सतह के लगभग एक-तिहाई हिस्से को घेरे हुए है और दुनिया के महासागरों के कुल पानी का लगभग आधा हिस्सा इसमें है।   रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशांत महासागर लगभग सबडक्शन जोन से घिरा हुआ है। इसे रिंग आॅफ फायर कहा जाता है। यह खाइयों, भूकंपों और ज्वालामुखियों की एक बेल्ट है जो महासागर के किनारे-किनारे न्यूजीलैंड से जापान और फिर एंडीज तक फैली हुई है। पैसिफिक में अपनी एक फैलती हुई रिज भी है जिसे ईस्ट पैसिफिक राइज कहते हैं। इसके आस-पास की खाइयों में इसकी जमीन का इतना बड़ा हिस्सा समा रहा है कि कुल मिलाकर यह बेसिन सिकुड़ रहा है।  वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा होने से महाद्वीप एक साथ मिलकर अमासिया नाम का एक नया महाद्वीप बनाएंगे। इससे अमेरिका और एशिया आपस में जुड़ जाएंगे। शोधकर्ताओं के अनुसार आॅस्ट्रेलिया पहले से ही हर साल लगभग 7 सेंटीमीटर की रफ्तार से एशिया की ओर बढ़ रहा है। इससे अलग-अलग नामों वाले अलग-अलग सुपरकॉन्टिनेंट जोनों का विकास होगा।