जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद एक और बड़ा आंदोलन चल रहा है। हैरानी वाली बात यह है कि यहां न तो सीजेपी के कार्यकर्ता नजर आ रहे हैं न सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ता। झारखंड के ये छात्र अपने आंदोलन की अगुवाई खुद कर रहे हैं। रांची में जेपीएससी और जेएसएससी में धांधली के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का आज 11वां दिन है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन जी धरने की तरह तरह ही छात्र दिन-रात जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। झारखंड में सरकारी नौकरियों में घूसखोरी, संगठित गिरोह और भर्तियों में गड़बड़ी पर छात्रों का गुस्सा चरम पर पहुंच चुका है। झारखंड के अभ्यर्थियों का यह गुस्सा हाल ही में हुए कई विवादों की वजह से है। जिनमें परीक्षा के पेपर लीक होना, प्रशासन के अजीब फैसले और व्यवस्थागत गड़बड़ियां शामिल हैं। इन छात्रों का कहना है कि इन सबने उनके नौकरी पाने की संभावनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। छात्रों की मांग किसी परीक्षा को रद्द कराने की नहीं, बल्कि 4-5 वर्षों की दस से अधिक विवादित भर्तियों की दूसरे राज्य के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों से जांच, दोषियों पर कार्रवाई व व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की है। आंदोलनकारी इसे युवाओं के भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे की लड़ाई बता रहे हैं।
पेपर लीक को लेकर छात्रों में गुस्सा
बता दें कि छात्रों का गुस्सा उस समय फूटा, जब महीने की शुरूआत में 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद एक अभ्यर्थी के पास ओएमआर शीट सामने आ गई। जंतर-मंतर के जेन जी आंदोलन से प्रेरित होकर रांची की बापू वाटिका में एक छोटी-सी सभा के तौर पर शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। बता दें कि 29 जुलाई को यह विरोध-प्रदर्शन बड़े आंदोलन में बदल गया, जब आयोजकों ने महा आंदोलन और संविधान मार्च का आह्वान किया। छात्र नेताओं ने हर जिले के उम्मीदवारों से राज्य की राजधानी में इकट्ठा होने की अपील की। इसके बाद छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जमा होने लगे और 6 दिन बाद यहां हजारों की संख्या छात्र जमा हो गए।
पैसे लेकर नौकरी दिलाने का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलाने वाला संगठित गिरोह सक्रिय है। कई भर्तियों में तो रेट 25 लाख से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। आरोप है कि जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा से पहले ही 120 प्रश्नों वाला पूरा पेपर चुनिंदा लोगों तक पहुंचा दिया गया, उत्तर रटवाए गए। जांच में पुष्टि हुई, पर सरकार ने इसे नकार दिया। इसी तरह लेडी सुपरवाइजर भर्ती में फर्जी डिग्रियों पर नौकरी दी गई। 33 महिलाओं की स्नातक डिग्री एक ही निजी विवि की मिली, तो नियुक्तियां रोकनी पड़ी। उत्पाद सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा से पहले रांची में पुलिस ने सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड समेत 164 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया। सभी अभ्यर्थियों से 10 से 15 लाख लेकर प्रश्नपत्र के उत्तर रटवाए जा रहे थे। खास बात यह है कि छात्र झारखंड आंदोलन के अगुवा और पूर्व सीएम दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर बैठे हैं। बता दें कि हेमंत शिबू सोरेन के बेटे हैं। छात्रों का कहना है कि शिबू ने युवाओं के अधिकार का सपना देखा था, उसी सपने के लिए वे मैदान में उतरे हैं, क्योंकि यहां छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।
छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं अर्चना कुमारी ने गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि दस से अधिक परीक्षाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं। यही वजह है कि राज्यभर में छात्र सड़कों पर है। छात्र संगठनों ने छह और 10 अगस्त को विधानसभा के घेराव का एलान किया है। प्रदर्शन की खास बात यह है कि आंदोलनकारी छात्रों ने एक मिसाल भी पेश की है। एक ओर जहां जंतर-मंतर पर हुए जेन जी आंदोलन में पीएम मोदी समेत कई नेताओं को गालियां दी गई थी। उन पर अभद्र टिप्पणियां भी गई थी। वहीं इस आंदोलन में शामिल छात्रों ने अपनी आचार संहिता तैयार की है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मंच पर कोई भी राजनीतिक दल या बाहरी नेता नहीं आएगा। किसी भी प्रकार का राजनीतिक, धार्मिक व जातिगत वक्तव्य नहीं दिया जाएगा। किसी नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी वाला वीडियो भी जारी नहीं होगा। आंदोलन के मुख्य उद्देश्य पर ही बात रखी जाएगी। लड़ाई व्यवस्था में सुधार की है, इसलिए किसी भी व्यक्ति पर मंच से आरोप नहीं लगाए जाएंगे और अपने वक्तव्य में अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसका पोस्टर भी चस्पा किया गया है। दूसरी ओर जहां जंतर-मंतर पर भोजन खिलोन वालों की कमी नहीं थी। देश ही विदेश से यहां के छात्रों को मदद मिलने का आरोप है। वहीं यहां छात्रों को दूर-दराज के गांवों से ही भोजन और जरूरी सामान मिल रहा है। यहां छात्रों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वह पर्याप्त नहीं हो पा रहा है। ये कई दिनों से बिस्कुट और नमकीन के सहारे आंदोलन चला रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता नजर नहीं आए
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां न तो सीजेपी के कार्यकर्ता नजर आ रह हैं न सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ता। वहीं अब यहां वांगचुक की तरह ही देवेंद्र नाथ महतो आमरण आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उनकी खूब चर्चा हो रही है। तीन दिन से अन्न-जल त्यागकर बैठे देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों को उन्हें ड्रिप लगानी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता यह अनशन जारी रहेगा। उन्हें अपनी जान की परवाह नहीं है। दूसरी ओर, एक अन्य छात्र ब्रह्मानंद भी तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद खुले आसमान के नीचे अनशन जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा 5 अन्य छात्र भी अनशन पर बैठे हैं।
संघर्षों से भरा रहा देवेंद्र नाथ महतो का सफर
बता दें कि रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव से आने वाले देवेंद्र नाथ महतो का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। मैट्रिक, इंटर, ग्रेजुएशन, बीएड और दो विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन प्रथम श्रेणी से पास किया। संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा में उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद उन्होंने नौकरी की बजाय छात्रों के अधिकारों की लड़ाई को अपना रास्ता चुना। उन्होंने 2024 में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के टिकट पर रांची सीट से लोकसभा का लड़ा भी लड़ा था। चुनाव में उन्हें 1,32,647 वोट मिले थे। इसके बाद उन्होंने सिल्ली विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ा लेकिन दोनों बार उन्हें पराजय मिली। छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाने की वजह से देवेंद्र नाथ महतो पर 11 मामले दर्ज हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि ये सभी मामले छात्र हितों की लड़ाई लड़ने के दौरान दर्ज हुए हैं। छात्रों का मानना है कि आज महतो झारखंड के हजारों युवाओं की उम्मीद बन चुके हैं। उनका आमरण अनशन राज्य की राजनीति और भर्ती व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। दूसरी ओर भर्तियों में गड़बड़ी की जांच दूसरे राज्य के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के पैनल से कराने की मांग पर सीएम हेमंत सोरेन ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। सभी तथ्य सामने आने पर उचित निर्णय लेंगे। बता दें कि बहुचर्चित मेधा घोटाले में देर रात सीआईडी ने तीन दलालों को गिरफ्तार कियां है। ये एजेंट पैसे लेकर अभ्यर्थियों का परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल से संपर्क कराते थे।





