शनि ग्रह पर बड़ी कामयाबी, रहस्यमयी बादल देख वैज्ञानिक हैरान

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली है। शोधकर्ताओं ने इस जगह पर बहुत बड़ा रहस्यमय बादल खोजने में सफलता हासिल की है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बादल का आकार 10 भुजाओं वाले डेकागोन जैसा है। नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने इसकी तस्वीरें खींची थी। अंतरिक्ष शनि हमेशा से रहस्यमयी माना जाता रहा है। वहीं उसके छल्ले वैज्ञानिकों के लिए आज भी अबूझ पहेली बने हुए हैं। बता दें कि शनि ग्रह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना एक गैसीय विशालकाय ग्रह है। इसके चारों ओर बर्फ और चट्टानी टुकड़ों से बने सुंदर और प्रमुख वलय यानी छल्ले हैं। यह हमारे सौरमंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसका घनत्व पानी से भी कम है। इसका व्यास पृथ्वी से लगभग नौ गुना बड़ा है।
दक्षिणी ध्रुव पर मिली रहस्यमयी चीज 

अब शोधकर्ताओं ने शनि के दक्षिणी ध्रुव पर एक नई और रहस्यमय चीज देखी है। इसमें पाया गया कि वहां बादलों से बना एक विशाल 10 भुजाओं वाला स्ट्रक्चर मौजूद है। वैज्ञानिक भाषा में इसे डेकागोन बताया जा रहा है। यह खोज विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा रही है। बता दें कि दशकों से वैज्ञानिक शनि के उत्तरी ध्रुव पर एक छह भुजाओं वाले हेक्सागोन को देखते आ रहे थे। नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप के अनुसार खोजा गया नया 10 भुजाओं वाला स्ट्रक्चर उससे कहीं ज्यादा बड़ा और हैरान करने वाला है। इस खोज ने साबित कर दिया है कि शनि ग्रह का मौसम हमारी सोच से भी ज्यादा जटिल है। रिसर्चर्स अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर गैस के इस विशाल गोले पर ऐसे रहस्यमय आकार कैसे बन रहे हैं। बता दें कि स्पेन की यूनिवर्सिटी आॅफ द बास्क कंट्री के प्लैनेटरी साइंटिस्ट अगस्टिन सांचेज-लावेगा इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता हैं। गस्टिन सांचेज-लावेगा के अनुसार यह एक बहुत ही असामान्य वायुमंडलीय घटना है। यह हमें मौसम विज्ञान को समझने में मदद कर रही है। इस खोज ने साबित कर दिया है कि शनि ग्रह का मौसम हमारी सोच से भी ज्यादा जटिल है। रिसर्चर्स अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर गैस के इस विशाल गोले पर ऐसे रहस्यमय आकार कैसे बन रहे हैं। बता दें कि जिस नए डेकागोन की खोज की गई है उसका आकार काफी बड़ा है। रिसर्च के अनुसार इसकी चौड़ाई लगभग 1,67,820 किलोमीटर है। वहीं इसकी 10 भुजाओं में से हर एक की लंबाई करीब 16,782 किलोमीटर मापी गई है। इसकी तुलना में, पृथ्वी का उत्तर से दक्षिण ध्रुव तक का व्यास लगभग 12,714 किलोमीटर है।  
अपने अक्ष पर झुका है शनि

वैज्ञानिकों के अनुसार शनि ग्रह अपने अक्ष पर थोड़ा झुका हुआ है। इस वजह से 2012 से लेकर 2023 तक इसका दक्षिणी हिस्सा धरती से नजर नहीं आ रहा था। हबल इमेजेस ने 2023 में पहली बार इस डेकागोन को दुनिया के सामने पेश किया था। अगस्टिन ने बताया कि यह खोज उनके लिए बहुत बड़ा सरप्राइज थी। जब से उत्तरी ध्रुव पर हेक्सागोन मिला था, तब से वे दक्षिण में भी ऐसे ही किसी आकार की तलाश कर रहे थे। सालों तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इस नए डेकागोन को शनि का एक चक्कर पूरा करने में करीब 800 दिन लगते हैं। पुरानी रिसर्च बताती है कि शनि का हेक्सागोन तेज हवाओं के घुमावदार रास्ते की वजह से बना था। कंप्यूटर सिमुलेशन से पता चला है कि यह डेकागोन भी इसी तरह के एक घुमावदार वायुमंडलीय जेट की वजह से बना है। उत्तरी ध्रुव का हेक्सागोन दशकों से एक जैसा ही काला नजर आता है। इसके विपरीत यह नया डेकागोन अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग डार्कनेस दिखाता है। इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि यह अभी भी बन रहा है और इसमें लगातार बदलाव हो रहे हैं।