जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। अब दुनिया का नक्शा बदल गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस नक्शे को मंजूरी दी है। नए नक्शे के अनुसार अब अफ्रीका बड़ा दिखाई देगा। वहीं उत्तरी अमेरिका और यूरोप का आकार कम हो जाएगा। इस पर दोनों महाद्वीपों ने यूएन में विरोध जताया है।
अब पहले जैसा नहीं रहा दुनिया का नक्शा
दुनिया का नक्शा अब पहले जैसा नहीं रहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी यूएन ने एक नए विश्व मानचित्र को मंजूरी दी है। जिसमें महाद्वीपों का आकार एक-दूसरे के मुकाबले ज्यादा सही दिखाया गया है। इस नक्शे में अफ्रीका पहले से बड़ा नजर आएगा। जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार छोटा दिखेगा। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट किया। 6 देश वोटिंग से दूर रहे, जबकि अमेरिका अकेला ऐसा देश रहा जिसने इसका विरोध किया। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी यूएनजीए में पारंपरिक दुनिया के नक्शे यानी मर्केटर को बदलने के लिए करेक्ट द मैप प्रस्ताव लाया गया था। इस मैप के अनुसार 16वीं सदी का मर्केटर नक्शा उत्तरी गोलार्ध के देशों को बड़ा और भूमध्य रेखा के पास के देशों को छोटा दिखाता है। नए और सटीक अनुमान वाले इक्वल अर्थ मैप से अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अन्य भूमध्यरेखीय क्षेत्रों का वास्तविक और बड़ा आकार सामने आएगा। वहीं, यूरोप, रूस और कनाडा जैसे इलाके मौजूदा मर्केटर नक्शे की तुलना में नए नक्शे में छोटे दिखाई देंगे।
अफ्रीका की सटीक जानकारी
नया नक्शा अफ्रीका को सबसे अधिक सटीक रूप से दर्शाता है। नए नक्शे को टोगो ने पेश किया जबकि अफ्रीकी संघ के सदस्यों ने पुरजोर समर्थन किया। मानचित्र सुधार प्रस्ताव फ्रांस और ब्रिटेन सहित 164 देशों के समर्थन से पारित हो गया। अमेरिका इकलौता देश रहा, जिसने इसके खिलाफ मतदान किया और छह देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया। 16वीं शताब्दी से उपयोग हो रहे मर्केटर मानचित्र की आलोचना की जाती रही है क्योंकि यह अफ्रीका को ग्रीनलैंड के समान आकार का दिखाता है, जबकि वास्तव में यह उससे 14 गुना बड़ा है। इस प्रस्ताव पर मतदान को बेहद जरूरी बताया जा रहा है। अब आने वाले दिनों में दुनियाभर में दिखाए-पढ़ाए जाने वाले वैश्विक नक्शों में बदलाव करना जरूरी हो जाएगा। इसकी जगह नए नक्शे ले लेंगे। इतना ही नहीं मौजूदा नक्शे में दिखने वाले महाद्वीप के साथ भारत और कई देशों की स्थिति में बड़ा बदलाव हो जाएगा। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक नक्शे पर बदलाव कराने का दम रखने वाले इस प्रस्ताव की जरूरत क्यों पड़ी? संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर दर्शाए जाने वाले मानचित्र को बदलने और सदियों पुराने मर्केटर प्रोजेक्शन मैप की जगह समान-क्षेत्र दर्शाने वाले मानचित्रों को वैश्विक मानक बनाने से जुड़ा था। इस प्रस्ताव को अफ्रीकी देश टोगो की ओर से प्रायोजित किया गया, जिसे 55-सदस्यीय अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला।
विश्व का नया मानचित्र
बता दें कि इस समय दुनिया में विश्व का जो मानचित्र दिखाया जाता है, वह 400 साल से भी ज्यादा पुराना है। इसे गेरहार्डस मर्केटर की ओर से दुनियाभर में व्यापार के लिए जाने जाने वाले नाविकों की मदद के लिए बनाया गया था। इससे नाविक सफर के दौरान सीधी रेखा खींचकर दिशा तय की थी। गोल पृथ्वी को सपाट कागज पर उतारने के इस तरीके के कारण, जैसे-जैसे हम भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ते हैं, जमीन का आकार काफी ज्यादा खिंचकर बड़ा हो जाता है। इसका असर यह होता है कि भूमध्य रेखा के करीब स्थित क्षेत्र, जैसे- अफ्रीका, भारत, दक्षिण अमेरिका बहुत छोटे दिखाई देते हैं। वहीं, ध्रुवों के करीब वाले देश, जैसे कनाडा, रूस, अमेरिका और यूरोप अपने वास्तविक आकार से कहीं ज्यादा बड़े दिखाई देते हैं। वहीं अगर पुराने मानचित्र और असल क्षेत्रफल की तुलना की जाए तो वास्तव में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है। इसी तरह अन्य देशों के साथ विसंगतियां थी।




