नागपुर, एजेंसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को विश्व की आत्मा करार देते हुए सोमवार को कहा कि देश के आध्यात्मिक ज्ञान ने उसे भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के उन तूफानों के बीच टिकाए रखा, जिन्होंने कई समाजों को नष्ट कर दिया। भागवत ने नागपुर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव में संतों की एक सभा को संबोधित करते हुए देश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और उसे लोगों तक पहुंचाने में संतों की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, जब तक हमारा देश अस्तित्व में है, दुनिया ठीक रहेगी, क्योंकि यदि दुनिया शरीर है तो भारत उसकी आत्मा है। भागवत ने कहा कि भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के तूफानों ने दुनिया के कई समाजों को नष्ट कर दिया, लेकिन भारत अपने आध्यात्मिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता के कारण इनसे बचा रहा। उन्होंने कहा, यह कहा जाता है कि यूनान, मिस्र और रोम की प्राचीन सभ्यताएं दुनिया से मिट गईं लेकिन हमारे अस्तित्व में कुछ विशेष बात है कि यह मिटा नहीं। यह अस्तित्व वह ज्ञान है जो हमें संतों और महात्माओं से मिला है। उन्होंने कहा, दुनिया के पास वह आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है जो हमारे पूर्वजों के पास था। उन्होंने कहा कि जब-जब दुनिया संकट में होती है, भारत उसे आगे का रास्ता दिखाता है।
समाज के गौभक्त बनते ही रुक जाएगी गौहत्या
गौसंरक्षण और गौहत्या के मुद्दे पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि समाज को गौभक्त बनाया जाए तभी गौहत्या अपने आप रुक जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज को गौभक्त बनाना जरूरी है। ऐसे में समाज का समर्थन बेहद जरूरी है। बिना समाज के समर्थन ये कार्य नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है. उन्होंने कहा कि गौ-जागृति को मजबूत करना होगा। जब जनभावना तैयार हो ।





