जनप्रवाद ब्यूरो। भारत ने महज 2.3 करोड़ में बेबी ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण कर दुनिया को चौंका दिया। अब डीआरडीओ ने इस रॉकेट सिस्टम का एयर वर्जन डेवलप कर लिया है। इससे यह एक बेहतरीन एयर टु सरफेस हथियार बन गया है। अब इसी रॉकेट को फ्रांस राफेल के बदले खरीदने को बेताब है। यह अमेरिकी सिस्टम से 10 गुना सस्ता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया खास सिस्टम
सस्ते हथियारों के निर्माण के मामले में भारत का दुनिया में जवाब नहीं है। डीआरडीओ और भारतीय वैज्ञानिक दुनिया के विकसित और ताकतवर देशों की तुलना में बेहद कम लागत में शानदार उपकरण और हथियार बना रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो भी डीआरडीओ का सहयोग कर रही है। इसी क्रम में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जिसकी प्रति यूनिट की लागत महज 2.3 करोड़ रुपये है। इस सिस्टम का नाम है पिनाका रॉकेट सिस्टम है। अब डीआरडीओ ने इस रॉकेट सिस्टम का एयर वर्जन विकसित कर दुनिया को चौंका दिया है। हवा में मार करने की बेहतर क्षमता के कारण यह शानदार एयर टु सरफेस हथियार बन गया है। डीआरडीओ का कहना है कि इसको विकसित करने का मुख्य उद्देश्य रॉकेट सिस्टम की लागत को कम करना है। यह कम लागत में वही काम करेगा जो ब्रह्मोस मिसाइल करती है।
अन्य देशों की तुलना में काफी सस्ती
अगर इसी सिस्टम के समान अमेरिकी वर्जन खरीदा जाए तो इसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आएगी। अमेरिका की तुलना में भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे 10 गुना कम दाम में बना दिया है। अब इस रॉकेट सिस्टम को फ्रांस समेत अन्य सुपर पावर देश खरीदने के इच्छुक हैं। कई रिपोर्ट में भी यही दावा किया गया है। जिसमें कहा गया है कि राफेल विमान के बदले फ्रांस भारत से पिनाका सिस्टम चाहता है। बता दें कि मूल रूप से इस हथियार का निर्माण भारतीय सेना के लिए किया गया है। हमले के समय सटीकता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
आसानी से फाइटर जेट्स से दागी जाएगी मिसाइल
डीआरडीओ ने एयर वर्जन को इस तरह से बनाया है जिससे कि इसको आसानी से फाइटर जेट्स से दागा जा सके। पहले की तुलना में इसमें कुछ परिवर्तन भी किए गए हैं। जैसे इसकी लंबाई को कम कर 4.8 मीटर कर दिया गया है। इससे यह मिसाइल सिस्टम की तरह फाइटर जेट में आसानी से लग सके। इसके साथ ही इसके प्रोपल्सन सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। इससे यह और खतरनाक बन गया है। इन बदलावों से यह सिस्टम फाइटर जेट्स से दागे जाने के बाद बेहद ऊंचाई से सुपरसोनिक या फिर हाइपर सोनिक स्पीड से वार करता है। यह सामान्य बैलेस्टिक मिसाइलों से अलग एयरोडायनेमिक सरफेस का इस्तेमाल करता है। यह रास्ते में ही अपना पाथ बदलने में सक्षम है। यही कारण है कि दुश्मन देशों के लिए इसके हमले को रोकना लगभग नामुमकिन हो चुका है।
ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
अब सवाल उठता है कि भारत के पास जब ब्रह्मोस जैसा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है तो पिनाका रॉकेट का एयर वर्जन क्यों बनाने की जरूरत पड़ी। इसका जवाब है जहां बंदूक से काम हो जाए वहां तोप दागने की जरूरत नहीं होती है। आम तौर देखा जाए तो दोनों हथियारों का लक्ष्य दुश्मन को तबाह करना है। इन दोनों के काम में अंतर है। ब्रह्मोस को बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक के लिए डिजाइन किया गया है। यह दुश्मन के युद्धपोत, कमान सेंटर और बेहद मजबूत बंकरों को तबाह कर सकता है। यह दुश्मन के राडार से बचने के लिए समंदर या धरती से सतह के बेहद करीब से ट्रैवल करता है। वहीं पिनाका का काम सटीक और छोटे लक्ष्य को भेदना है। इसको दुश्मन के टैंकों के काफिले, एयरफील्ड और सैनिकों के जमावड़े को टार्गेट करने के लिए डेवलप किया गया है। यह बहुत तेजी से वार करता है। साथ ही कुछ ही पल में एक साथ कई टारगेट को हिट कर सकता है।





