जनप्रवाद ब्यूरो। रोबोटिक्स की दुनिया में नई खोज ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। इस खोज से भविष्य के रोबोट्स इंसानों की तरह देख सकेंगे। यानी उनके पास इंसान की तरह आंखे होंगी। साउथ चाइना यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर ने नया फ्लेक्सिबल कैपेसिटिव सेंसर ऐरे डेवलप किया है। इससे रोबोट्स दूर की चीजों का भी पता लगा पाएंगे।
भविष्य में काम करने का बदल जाएगा तरीका
भविष्य में काम करने का समय बदलने वाला है। इंसानों की जगह ज्यादतर काम रोबोट्स करते नजर आएंगे। इन रोबोट्स को और भी ज्यादा उपयोगी और स्मार्ट बनाने के लिए कंपनियां कई तरह की तकनीकों पर काम कर रही हैं। शोध में पाया गया कि भविष्य में इंसानों के साथ मिलकर काम करने के लिए रोबोट को दो अलग-अलग तरह की क्षमताओं की जरूरत होगी। इसमें रोबोट्स को दूर से आने वाले लोगों के बारे में पता लग जाना चाहिए। साथ ही रोबोट को हल्के से टच का अहसास होना जरूरी है। इन दोनों क्षमताओं को एक ही सेंसर में जोड़ने में काफी मुश्किल हो रही थी। अब इंजीनियरों ने इस काम को मुमकिन कर दिखाया है। इसके लिए छोटे इलेक्ट्रोड का विकास किया गया है। इससे कम दूरी से चीजों का पता लगाया जा सकता है। बड़े इलेक्ट्रोड ज्यादा दूरी से वस्तुओं को महसूस कर सकते हैं। साउथ चाइना यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर ने यह तकनीक विकसित की है। शोधकर्ता के अनुसार नए फ्लेक्सिबल कैपेसिटिव सेंसर ऐरे की मदद से इस कमी को दूर कर लिया है। यह सेंसर अपने आस-पास के माहौल को समझने के तरीकी में तेजी लाता है।
सिस्टम के बारे में दी जानकारी
रिसर्चर ने सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि रोबोट को दूर की चीजों का पता लगाने के लिए इस तकनीक का पहले चरण में परीक्षण किया। यह परीक्षण सफल रहा। रोबोट ने दूर की वस्तुओं को न केवल पहचाना बल्कि अन्य आहटों को भी महसूस किया। इस डिजाइन में इलेक्ट्रोड के ऐरे के ऊपर शील्डिंग परत लगाई गई है। इलेक्ट्रोड के आपस में जुड़ने और ढके होने के तरीके को बदला गया है। रिसर्चर का कहना है कि यह विचार इस बात से आया कि इंसानी आंख देखने की अलग-अलग स्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेती है। जब हम किसी किताब पर ध्यान या जोर देते हैं तो हमारी आंखों की पुतलियां सिकुड़ जाती हैं ताकि बारीक डिटेल्स साफ-साफ दिखें। जब हम किसी अंधेरी और दूर की सड़क को देखते हैं, तो वे फैल जाती हैं ताकि ज्यादा रोशनी अंदर आ सके। यही लॉजिक इलेक्ट्रिक फील्ड्स पर भी लागू किया गया।
मानवीय आंखों की तरह करेगा काम
रिसर्चर ने अपनी तकनीक के बारे में आगे बताया कि जब शील्डिंग लेयर सेंसिंग एरिया को रोबोट सिकोड़ लेता है तो सिस्टम अलग-अलग सेंसिंग यूनिट्स पर फोकस करता है। इससे बारीक स्पर्श का भी पता चल जाता है। यह मोड तब काम आता है जब रोबोट को नाजुक चीजों को पकड़ना हो या छोटी चीजों के किनारों की पहचान करनी होती है। इससे रोबोट को कॉन्टैक्ट में आने से पहले ही पास आ रही चीजों का पता लगाने में मदद मिलती है। टेस्ट में सेंसर ने 90 एमएम से कम दूरी से आ रही चीजों का पता लगा लिया। यह दूरी भले ही कम लगे, लेकिन यह काफी है। इस विशेषता के कारण यह रोबोटिक आर्म किसी व्यस्त माहौल में काम कर रहे इंसान से टकराने से पहले ही रुक जाएगा। इन समस्याओं का समाधान हो जाने से रोबोट और भी उपयोगी हो जाएंगे। भविष्य में आने वाले रोबोट इंसानों के साथ काम करते नजर आएंगे।





