आज नवरात्रि का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा से मिलती है मुक्ति 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली:  चैत्र नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है। गत बृहस्पतिवार यानी 19 मार्च को मां भवानी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की गई। आज यानी 21 मार्च को मां भवानी के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।  मंदिरों में भक्तों ने मां चंद्रघंटा की विशेष पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। नवरात्रि के तीसरे दिन भी मंदिरों में भक्तों की कतार देखने को मिली। इसके अलावा लोगों ने घरों में भी पूरे विधि- विधान से पूजा की। 

कैसा है मां चंद्रघंटा का स्वरूप
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा की तीसरी शक्ति साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, जिसके कारण उन्हें यह नाम मिला। स्वर्ण के समान चमकीले शरीर वाली, दस भुजाओं वाली माँ चंद्रघंटा सिंह पर सवार हैं और उनके दसों हाथों में विभिन्न शस्त्र हैं। वे भक्तों के दुखों, भय का नाश करती हैं और उन्हें निर्भयता प्रदान करती हैं। मान्यता है कि इनकी कृपा से शत्रुओं पर विजय, यश-कीर्ति में वृद्धि, और सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर साहस और शांति प्रदान करती हैं।

मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा
नवरात्रि के तीसरे दिन विधि-विधान से मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि, जब असुरों का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया और देवताओं पर संकट मंडराने लगा, तब देवी ने चंद्रघंटा का स्वरूप लिया था। कहते हैं कि, उस समय महिषासुर और देवताओं के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था। देवताओं की पीड़ा-दुख को सुनकर त्रिदेव क्रोधित हो उठे। इसके बाद उनके तेज और ऊर्जा से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसे मां चंद्रघंटा के रूप में जाना जाता है। इसके बाद देवी को देवताओं ने विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और सिंह वाहन प्रदान किया। इन दिव्य शक्तियों से सुसज्जित होकर मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार किया था। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से साधक को अद्भुत आत्मबल और निर्भयता प्राप्त करती हैं। 

खीर या शहद का लगााया जाता है भोग
मां चंद्रघंटा को खीर या शहद का भोग लगाया जाए, तो भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती हैं। साथ ही जीवन में सुख, शांति और साहस का संचार होता है।