आज नवरात्रि का सातवां दिन, मां कालरात्रि की होती है पूजा, मां को गुड़ से बनी चीजों का लगाया जाता है भोग 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली:  हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां भवानी के 9 अलग- अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। गत 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज यानी 25 मार्च को भक्तों ने मां भवानी के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा की और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा लोगों ने घरों में भी पूरे विधि- विधान से पूजा की। 

कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप
मां भवानी का सातवां स्वरूप माता कालरात्रि है, जिनकी पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है। यह रूप नकारात्मक शक्तियों, भय और शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है, इसलिए इन्हें 'शुभंकरी' भी कहते हैं। माता कालरात्रि का वर्ण घना काला, बाल बिखरे हुए, वाहन गधा और वे चार भुजाओं वाली हैं, जो दुष्टों का संहार करती हैं। माता कालरात्रि की तीन आंखें हैं जो ब्रह्मांड की तरह गोल हैं और सांसों से अग्नि निकलती है। उनके गले में बिजली की तरह चमकती माला है। माता के चार हाथों में से दो में तलवार और लौह-कांटा है, जबकि अन्य दो हाथ 'वर मुद्रा' (आशीर्वाद) और 'अभय मुद्रा' (निर्भयता) में रहते हैं।

मां कालरात्रि की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार शुंभ और निशुंभ नाम के राक्षसों ने चंड, मुंड और रक्तबीज की मदद से देवताओं को हरा दिया और तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया। इससे परेशान होकर इंद्र और अन्य देवताओं ने मां दुर्गा से मदद मांगी। तब मां दुर्गा ने अपना उग्र रूप, देवी चामुंडा, धारण किया और राक्षसों का नाश किया। मां काली ने चंड, मुंड और रक्तबीज का वध कर संसार में शांति स्थापित की। मां काली, मां दुर्गा का सबसे शक्तिशाली और उग्र रूप हैं। वे बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करती हैं और अपने भक्तों को सुरक्षा, साहस और शांति देती हैं।

मां कालरात्रि का भोग
मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों (जैसे हलवा, खीर, मालपुआ) का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुड़ का भोग लगाने से दरिद्रता दूर होती है, शत्रुओं का नाश होता है और भय से मुक्ति मिलती है।