जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: आज नवरात्रि का पांचवां दिन है। आज मां भवानी के पांचवें स्वरुप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। सोमवार यानी 23 मार्च को भक्तों ने मां भवानी के पांचवें स्वरूप की पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा लोगों ने घरों में भी पूरे विधि- विधान से पूजा की।
कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप
नवरात्रि के पांचवें दिन मां भवानी के 5वें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इन्हें ममता और वात्सल्य की देवी माना जाता है, जो भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं। वे सिंह पर सवार होकर कमल के आसन पर विराजमान हैं और अपनी गोद में बाल कार्तिकेय को लिए रहती हैं। उनकी पूजा से ज्ञान, शक्ति और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा से बुद्धि, ज्ञान और संतान सुख की प्राप्ति होती है। वे अपने भक्तों को सभी कष्टों से मुक्त करती हैं।

मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार असुर तारकासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। उसे वरदान था कि केवल शिव पुत्र ही उसका वध कर सकता है। लेकिन शिव योग में लीन थे। जब असुरों का अत्याचार बढ़ा और देवता असहाय हो गए, तब महादेव और माता पार्वती की ऊर्जा से उनके पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ। माँ ने उसे पालन-पोषण, शिक्षा और युद्ध की कला सिखाई। जब स्कंद युद्ध के लिए तैयार हुए, माँ ने उन्हें सिंह पर बैठाकर युद्धभूमि में भेजा। उन्होंने देवताओं का नेतृत्व करते हुए असुरों का संहार किया और देवताओं को विजय दिलाई। इस प्रकार माँ स्कंदमाता ने माँ, गुरु और शक्ति तीनों रूपों में सृष्टि की रक्षा की। लेकिन इसी कारण माता पार्वती को स्कंदमाता भी कहा गया।
केले का भोग मां को है अति प्रिय
मां स्कंदमाता को केले के भोग प्रिय है। केले के भोग से मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सभी कष्टों से मुक्त करती हैं।





