आज है खरना, प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के व्रत की होगी शुरुआत

जनप्रवाद ब्यूरो,  नई दिल्ली: लोक आस्था के महापर्व चैती छठ की शुरुआत हो चुकी है। रविवार को लोगों ने नहाय- खाय परंपरा के साथ पर्व की शुरुआत की। आज छठ का दूसरा दिन खरना है। खरना के दिन व्रतधारी महिलाएं तथा पुरुष शाम को अपने हाथों से बने मिट्टी के चूल्हे पर मीठा प्रसाद तैयार करती है। प्रसाद में कच्चे चावल या साठी ( चावल का एक प्रकार जो हल्का गुलाबी होता है) के चावल की खीर(रसिया) तथा रोटी बनाई जाती है। खीर में चीनी या शक्कर की जगह गुड का प्रयोग किया जाता है। प्रसाद बनाते समय साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रतधारी स्वयं इस प्रसाद को तैयार करती है और छठ माता को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करती है। व्रती के ग्रहण करने के बाद प्रसाद घर के सदस्यों सहित अन्य लोगों में बांटा जाता है। इसी के साथ ही व्रती का 36 घंटे का उपवास भी शुरू होता है। 
 
पूर्वांचल समुदाय के लोगों में छठ को लेकर उत्साह देखने को मिलता है। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अलग- अलग हिस्सों में छठ के संबंधित सामग्री का बाजार सजाया गया है। नोएडा के पॉश इलाके में छठ पूजा की तैयारियां की जा रही है। कहीं कृत्रिम तालाब का निर्माण कर तो कही स्विमिंग पूल का प्रयोग अर्घ्य के लिए किया जाएगा। 

जात- पात से ऊपर उठकर सोचने का देती है संदेश
छठ पूजा की हिंदू धर्म में काफी मान्यता है। कहा जाता है कि छठ पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।  छठ पूजा जाति विशेष का त्यौहार ना होकर स्थान विशेष का त्यौहार है। छठ माता को भगवान भास्कर की बहन माना जाता है। प्रकृति पूजा छठ पूजा का अहम अंग है।

कल है छठ पूजा का तीसरा दिन
कल यानी 24 मार्च को छठ पूजा का तीसरा दिन है। इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। तीसरे दिन व्रती महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं। साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करती हैं।  तीसरे दिन का निर्जला उपवास रात भर जारी रहता है।

छठ पूजा का चौथा दिन
छठ पूजा के चौथे दिन पानी में खड़े होकर उगते यानी उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं सात या ग्यारह बार परिक्रमा करती हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है। 36 घंटे का व्रत सूर्य को अर्घ्य देने के बाद तोड़ा जाता है। इस व्रत की समाप्ति सुबह के अर्घ्य यानी दूसरे और अंतिम अर्घ्य को देने के बाद संपन्न होती है।