आज से हिंदू नव वर्ष की हुई शुरूआत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरूआत चैत्र नवरात्रि के दौरान होती है। गुडी पड़वा को हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है। गुड़ी पड़वा जिसे विशेष रूप से महाराष्ट्र में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आता है। गुड़ी पड़वा के दिन घर की साफ-सफाई और सजावट की जाती है। साथ ही दरवाजे पर रंगोली भी बनाई जाती है। घर के बाहर ध्वज स्थापित किया जाता है। पारंपरिक व्यंजन जैसे पूरन पोली बनाई जाती और परिवार के साथ पूजा और उत्सव मनाया जाता है।

गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता है?
गुड़ी पड़वा के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं। मान्यता है कि जब भगवान राम ने रावण का वध कर अयोध्या वापसी की थी, तब लोगों ने गुड़ी यानी ध्वज लगाकर उनकी विजय का उत्सव मनाया। इसके अलावा इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए इसे सृष्टि का पहला दिन माना जाता है। गुडी को विजय और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। गुड़ी को घर के बाहर ऊंचाई पर लगाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत और समृद्धि का प्रतीक होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दी शुभकामनाएं
हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की शुरूआत होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामनाएं दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा कि भारतीय नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मैं आपको एवं आपके परिवार को शुभकामनाएं देता हूँ। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की यह पावन तिथि हमारी प्राचीन वैज्ञानिक कालगणना पद्धति का मान-बिन्दु है। आज से नवीन युगाब्द वर्ष, 5128 एवं नव विक्रम संवत्सर, 2083 का शुभारंभ हो रहा है। यह प्राचीन कालगणना हजारों वर्ष की हमारी सांस्कृतिक जीवंतता का एक प्रमाण भी है। आज से, अगले 9 दिनों तक हम चैत्र नवरात्रि का उत्सव भी मनाएंगे। नवरात्रि का यह पर्व हमें शक्ति और साधना के साथ-साथ त्याग और तितिक्षा का अवसर भी देता है।

अनेक साधक इस दौरान आहार और सुविधाओं को छोड़कर अनुशासन और संयम के मार्ग पर चलते हैं। नवरात्रि का यह पर्व शक्ति के विविध 9 स्वरूपों की साधना का पर्व भी है। यह हमारे उपनिषदों के उस "एकोऽहं बहुस्याम्" विचार का प्रतिबिंब है, जो हमें एक ही ईश्वर को अनेक रूपों में देखने की दृष्टि देता है। यह दृष्टि ही भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में स्थापित करती है और ‘विविधता में एकता’ को हमारा सहज स्वभाव बनाती है। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर, मैं माता आदिशक्ति से समस्त देशवासियों के कल्याण की कामना करता हूं।