भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी। देश भर में रामनवमी की धूम, निकाली जा रही है शोभायात्राएं और झांकियां

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: रामनवमी हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है जिसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह दिन चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन आता है और पूरे देश में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस खास अवसर पर भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, साफ-सुथरे कपड़े पहनते हैं और पूरे भक्ति भाव से भगवान राम की पूजा करते हैं। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और मंदिरों में जाकर भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं। रामनवमी चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ती है, ऐसे में इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। 

राम नवमी व्रत कथा 
पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ को लंबे समय तक संतान नहीं हो रही थी। तब उन्होंने अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर पुत्र प्राप्ति के लिए एक बड़ा यज्ञ कराया। इस यज्ञ में कई ऋषि-मुनियों को बुलाया गया। यज्ञ के बाद मिले प्रसाद को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा में बांट दिया। इसके प्रभाव से तीनों रानियां गर्भवती हुईं। सबसे पहले माता कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। इसके बाद माता कैकयी ने भरत को जन्म दिया और माता सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। जब अयोध्या के लोगों को राजकुमारों के जन्म की खबर मिली, तो पूरे नगर में खुशी का माहौल छा गया।

जानिए महत्व
राम नवमी पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था। उन्होंने धरती पर अधर्म को खत्म करने और धर्म की स्थापना करने के लिए रावण का वध किया था। इस दिन भक्त भगवान राम की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

देशभर में शोभायात्राएं और झांकियां
रामनवमी के अवसर पर कई शहरों में भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इन यात्राओं में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झांकियां आकर्षण का केंद्र होती हैं। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भजनों के साथ पूरे उत्साह से भाग लेते हैं। कई स्थानों पर रामायण के प्रसंगों का मंचन भी किया जाता है, जो लोगों को भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देते हैं।