जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां भवानी के 9 अलग- अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। गत 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज यानी 24 मार्च को भक्तों ने मां भवानी के छठे स्वरुप मां कात्यायनी की पूजा की और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा लोगों ने घरों में भी पूरे विधि- विधान से पूजा की।
कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप
नवरात्रि के छठे दिन पूजी जाने वाली मां दुर्गा का छठा स्वरूप मां कात्यायनी हैं जिन्हें 'महिषासुर मर्दिनी' और शक्ति व साहस की देवी माना जाता है। महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। मान्यता है कि इनकी पूजा से शीघ्र विवाह और वैवाहिक बाधाएं और अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही यह रोग, शोक, और भय का भी नाश करती हैं।

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने माता भगवती को प्रसन्न करने के लिए बहुत कठोर तप किया। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। कुछ समय बाद, महिषासुर नाम का एक बहुत शक्तिशाली राक्षस धरती पर अत्याचार करने लगा। उसके आतंक से सभी देवता परेशान हो गए, तब देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) से मदद मांगी। तब इन तीनों देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। यह देवी ही आगे चलकर महर्षि कात्यायन के यहां जन्मीं और उनका नाम मां कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी ने महिषासुर से युद्ध किया और उसे मारकर सभी देवताओं और लोगों को उसके अत्याचार से बचाया। इस कारण मां को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।
मां कात्यायनी का भोग
मां कात्यायनी को शहद या शहद से बनी खीर का भोग अर्पित करना खास माना जाता है। यह भोग उन्हें अत्यंत प्रिय है। माना जाता है कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।





