जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर लगा एक महीने का विराम अब समाप्त होने जा रहा है।14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा, जिससे विवाह, गृह प्रवेश और नूतन निर्माण जैसे शुभ कार्यों का मार्ग प्रशस्त होगा। विशेषज्ञों के अनुसार 15 मार्च से मीन राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ शुरू हुआ खरमास 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ संपन्न होगा। इसके बाद अप्रैल में विवाह के लिए केवल 9 दिन ही शुभ मुहूर्त हैं। आइए जानते हैं अप्रैल में विवाह के शुभ दिन और मुहूर्त कौन-कौन से हैं?
15 अप्रैल, दिन: बुधवार
20 अप्रैल, दिन: सोमवार
21 अप्रैल, दिन: मंगलवार
25 अप्रैल, दिन: शनिवार
26 अप्रैल, दिन: रविवार
27 अप्रैल, दिन: सोमवार
28 अप्रैल, दिन: मंगलवार
29 अप्रैल, दिन: बुधवार

19 अप्रैल को पूरे दिन अबूझ मुहूर्त, पंचांग देखने की नहीं जरूरत
अप्रैल के महीने में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। अक्षय तृतीया के दिन सुबह से लेकर रात तक स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, जिसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। अक्षय तृतीया के दिन आप बिना पंचांग देखें विवाह आदि जैसे सभी मांगलिक कार्य कर सकते हैं।
क्यों वर्जित थे मांगलिक कार्य?
ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि (मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे अपनी शक्ति खो देते हैं, जिसे 'खरमास' कहा जाता है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। अब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं और गुरु का बल भी बढ़ गया है जिससे विवाह के बाद वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।
विवाह का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है। इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है। विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है।





