जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: आगामी 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। माना जाता है कि होलिका की पवित्र अग्नि सभी नकारात्मक ऊर्जा और शक्ति को नष्ट कर देती है लेकिन क्या आपको पता है कि सबसे पहले होलिका दहन कहां किया जाता है। तो चलिए होलिका दहन से संबंधित सभी जानकारी हम आपको बताते हैं।
देश भर में सबसे पहले होलिका दहन महाकाल के दरबार में किया जाता है। महाकाल के दरबार में होलिका दहन के बाद महाकाल को गुलाल चढ़ाया जाता है और होलिका की राख से अगले दिन होली पर महाकाल का भव्य और दिव्य श्रृंगार किया जाता है।

चैत्र माह की फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है। महाकाल के दरबार में सबसे पहले होलिका दहन किया जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पुराने समय में किसी भी त्यौहार की शुरुआत राजा के घर से होती है। उसके बाद ही प्रजा त्यौहार मनाती है। महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है इसलिए सबसे पहले होलिका दहन महाकाल के दरबार में होता है। इसके बाद पूरे देश में होलिका जलाई जाती है। इस वर्ष 2 मार्च की शाम को होलिका जलाई जाएगी।
चंद्रग्रहण के कारण एक दिन बाद मनेगी होली
पंचांग के अनुसार धुलेंडी पर्व 3 मार्च को है लेकिन इस दिन चंद्रग्रहण होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चंद्रग्रहण का सूतक 3 मार्च मंगलवार सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा, जिसके बाद शाम 6:47 तक चन्द्र ग्रहण का मोक्ष रहेगा। इस चंद्रग्रहण के दौरान कुल 17 मिनट तक यह उज्जैन में भी दिखाई देगा। 3 मार्च को चंद्रग्रहण का सूतक होने से यह स्थिति साफ है कि या तो होलिका दहन चंद्रग्रहण का सूतक लगने के पहले यानी कि सुबह 6:30 के पहले मनाया जाएगा या शाम को 6:47 के बाद मनाया जाए। इसके बाद 4 मार्च को रंग खेला जाएगा।





