जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली : आगामी 19 मार्च से नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान मां भवानी के नौ स्वरुपों की पूजा की जाएगी। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएगी। मां दुर्गाा का पालकी पर सवार होकर आना ज्यादा शुभ नहीं माना जाता है। श्लोक कहता है कि 'दोलायां मरणं धुव्रम्'। इसका अर्थ है कि जब माता पालकी पर आती हैं, तो देश-दुनिया में महामारी, राजनीतिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ जाती है।
चैत्र नवरात्रि से शुरू हुई थी सृष्टि
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था और ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है. इसके अलावा भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था.
विदाई की सवारी भी है खास
सिर्फ आगमन ही नहीं, प्रस्थान की सवारी भी भविष्य बताती है। यदि नवरात्रि का समापन (नवमी/दशमी) शुक्रवार को होता है, तो माता हाथी पर विदा होती हैं, जो अत्यधिक वर्षा और खुशहाली का प्रतीक है। 2026 में नवमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिसका मतलब है कि प्रस्थान सुखद होगा, जो शुरुआत की मुश्किलों को कम कर देगा।

संकट से बचने के लिए क्या करें भक्त?
अगर सवारी के संकेत चुनौतीपूर्ण हों, तो विशेष पूजा-अर्चना से नकारात्मकता को कम किया जा सकता है:
दुर्गा सप्तशती का पाठ: इस बार कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करना सुरक्षा चक्र प्रदान करेगा।
हनुमान चालीसा: पालकी की सवारी के दोष को कम करने के लिए हनुमान जी की आराधना विशेष फलदायी होती है।
कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी को कन्याओं को हलवा-पूरी खिलाकर उनका आशीर्वाद लें।
दान: काले तिल और ऊनी वस्त्रों का दान करने से स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
2026 की नवरात्रि की प्रमुख तिथियां:
कलश स्थापना: 19 मार्च 2026
महाष्टमी (कन्या पूजन): 26 मार्च 2026
रामनवमी: 27 मार्च 2026





