जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: बृज क्षेत्र में लठमार होली से रंगोत्सव की शुरुआत हो जाती है। लठमार होली के बाद फूलों वाली होली और छड़ी-मार होली खेली जाएगी। फूलों वाली होली 28
फरवरी को वृंदावन के श्री बाकें बिहारी मंदिर और 1 मार्च को गोकुल में छड़ी मार होली खेली जाएगी। फूलों वाली होली के दौरान मंदिर में फूलों की बारिश करके होली उत्सव मनाया जाएगा है जिसकी छटा बेहद मनमोहक होगाी। ब्रज में माना जाता है कि कृष्ण और राधा ने वृंदावन की कुंज-गलियों में प्रेमपूर्वक फूलों से होली खेली थी। फूलों की नरम पंखुड़ियों में प्रेम, कोमलता और सौहार्द का संदेश छिपा होता है। इसी प्रेममयी वातावरण को बनाए रखने के लिए आज भी बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं।

बसंत पंचमी से शुरू हो जाता है होली का त्यौहार
बृज क्षेत्र जैसे गोकुल, बरसाना, मथुरा, वृंदावन आदि में बसंत पंचमी से ही होली की शुरुआत हो जाती है। इन 40 दिनों के दौरान लठमार होली, लड्डूमार होली, फूलों वाली होली, छड़ी मार होली और रंगों वाली होली खेली जाती है। लड्डूमार होली 25 फरवरी को बरसाना स्थित राधा मंदिर में खेली गई। इसके अलावा लठमार होली 26 फरवरी को बरसाने में खेली गई। 27 फरवरी यानी आज रंग भरी एकादशी पर भी होली खेली जाती है वहीं 28 फरवरी को श्री बाकें बिहारी मंदिर में फूलों वाली होली खेली जाएगी।

1 मार्च को खेली जाएगी छड़ी वाली होली
छड़ी-मार होली इस साल 1 मार्च 2026, रविवार को गोकुल में मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं पुरुषों को छड़ी से मारकर पारंपरिक उत्सव मनाती हैं। मान्यता है कि बाल कृष्ण गोपियों को तंग करते थे, इसलिए गोपियां उन्हें सबक सिखाने के लिए छड़ी लेकर पीछा करती थीं। इसमें नंदभवन से मुरलीधर घाट तक की यात्रा के दौरान फूलों से सजी पालकी में बाल गोपाल को ले जाया जाता है। भक्त खुद को धन्य मानते हैं और छड़ी से 'मार' को प्यार और आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करते हैं।





