जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां भवानी के 9 अलग- अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। गत 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज यानी 26 मार्च को भक्तों ने मां भवानी के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा की और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा लोगों ने घरों कन्या पूजन भी किया।
कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप
माता महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन पूजी जाने वाली मां दुर्गा की आठवीं शक्ति हैं जो अपनी श्वेत आभा (गौर वर्ण) के कारण शांत, सौम्य और कल्याणकारी मानी जाती हैं। चार भुजाओं वाली देवी वृषभ (बैल) पर सवार होकर, त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा से पाप नष्ट होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है। माता महागौरी की पूजा से बिगड़े काम बनते हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।

मां महागौरी की पौराणिक कथा
माता महागौरी से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने कठिन तपस्या की ताकि वो भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त कर सकें। माता ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए अन्न और जल तक का त्याग कर दिया। माता द्वारा कठोर तपस्या करने की वजह से मां पार्वती का गौर वर्ण भी समय के साथ-साथ काला पड़ने लगा, लेकिन माता ने अपनी कठोर तपस्या हजारों वर्षों तक जारी रखी। अंत में भगवान भोलेनाथ माता की तपस्या से प्रसन्न हुए और उनको दर्शन दिए।
माता महागौरी को लगाएं यह भोग
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को मुख्य रूप से नारियल या नारियल से बनी मिठाइयों का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा हलवा-पूरी, चने का प्रसाद, और सफेद मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं। मान्यता है कि यह भोग माता को अति प्रिय है और इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।





