मध्य प्रदेश के कटनी में मिले टाइटेनियम और वेनेडियम जैसे दुर्लभ खनिज, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। प्रमुख खनिज तत्व डोलोमाइट और लाइमस्टोन के लिए मशहूर कटनी अब देश के लिए रणनीतिक महत्व का नया केंद्र बन सकता है। यहां टाइटेनियम और वेनेडियम जैसे दुर्लभ खनिज मिलने के संकेत मिले हैं। यह देश के लिए बेहद उत्साहजनक खबर है। इससे भारत की रक्षा, अंतरिक्ष और हाई-टेक उद्योगों के लिए नई उम्मीद जगा दी है। 
रणनीतिक खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़

 

रणनीतिक खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़ के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कई कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने लिथियम, टाइटेनियम, टंगस्टन समेत रेयर अर्थ के 20 रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी के आठवें चरण की शुरूआत कर दी है। नौ राज्यों में फैले इन ब्लॉकों की नीलामी को रक्षा, उच्च प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से गेमचेंजर माना जा रहा है। इस बारे में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नीलामी प्रक्रिया की शुरूआत करते हुए कहा कि इन खनिजों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से भारत की आयात निर्भरता घटेगी। साथ ही वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका मजबूत होगी। बता दें कि इन रणनीतिक खनिजों का उपयोग लड़ाकू विमान, मिसाइल, पनडुब्बी, बख्तरबंद वाहन, रडार, सेमीकंडक्टर बनाने में होता है। इसके अलावा नाइट विजन सिस्टम, सैन्य संचार उपकरण, रक्षा उपग्रह, स्टील्थ तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और उर्वरक उद्योगों में इस रेयर अर्थ भूमिका बेहद अहम है। 
कटनी के नाम अब एक और उपलब्धि

इसी क्रम में मध्य प्रदेश की खनिज राजधानी कटनी के नाम अब एक और बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि जुड़ने जा रही है। डोलोमाइट, लाइमस्टोन और बॉक्साइट के लिए मशहूर यह जिला अब देश की रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक को नई रफ्तार देगा। कटनी के बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्लीमनाबाद में टाइटेनियम, वेनेडियम, एलुमिना और लैटेराइट जैसे अत्यंत दुर्लभ और रणनीतिक खनिजों के विशाल भंडार होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में इन दो खजिनों की विशेषताओं के बारे में जानना सबसे जरुरी हो जाता है। बता दें कि टाइटेनियम और वेनेडियम को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक खनिजों में गिना जाता है। इनका इस्तेमाल अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह तकनीक, मिसाइल, लड़ाकू विमान, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में मिश्र धातु बनाने के लिए किया जाता है। भारत वर्तमान में इन धातुओं के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। ऐसे में कटनी में इसकी खोज देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित होगी।
महत्वपूर्ण खजिनों के मिलने के संकेत

कटनी में दो महत्वपूर्ण खजिनों के मिलने के संकेत ने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। भूवैज्ञानिकों के ताजा सर्वेक्षण के बाद स्थानीय प्रशासन के साथ प्रदेश की सरकार भी सक्रिय हो गई है। राज्य की मोहन यादव सरकार ने इस क्षेत्र में छिपी खनिज संपदा को बाहर निकालने के लिए कमर कस ली है। इस ब्लॉक से व्यावसायिक खनन की दिशा तय करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस देने हेतु पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। नीलामी के बाद चुनी गई एजेंसी आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से जमीन के भीतर गहन अन्वेषण करेगी। इस सर्वे से साफ होगा कि ये दुर्लभ धातुएं जमीन में कितनी गहराई पर और कितनी मात्रा में मौजूद हैं। जिन क्षेत्रों में इन तत्वों का खनन किया जाएगा उनमें छपरा, निमास और देवरी गांव शामिल हैं। सर्वेक्षणकर्ताओं ने करीब 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल का एक विशाल कंपोजिट ब्लॉक तैयार किया है। खास बात यह है कि इस ब्लॉक का 200 हेक्टेयर से ज्यादा का हिस्सा अकेले कटनी जिले की सीमा में आता है, जिससे बहोरीबंद और स्लीमनाबाद क्षेत्र की भूमिका बेहद अहम हो गई है। खनिज विशेषज्ञों के अनुसारप यदि स्लीमनाबाद क्षेत्र में इन दुर्लभ खनिजों के व्यावसायिक भंडार की पुष्टि हो जाती है, तो यहां हजारों करोड़ रुपये के वैश्विक निवेश का रास्ता साफ होगा। माइनिंग, प्रोसेसिंग यूनिट्स, ट्रांसपोर्टेशन और सहायक उद्योगों के आने से स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश का कटनी जिला अब ट्रेडिशनल माइनिंग हब से बदलकर देश के आधुनिक क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर का मुख्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।