सैन्य उपकरणों के उत्पादन के लिए साझा ढांचा तैयार करेंगे भारत-जर्मनी, मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली, एजेंसी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर जाएंगे, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अंतिम रूप देना है। इस रोडमैप के तहत दोनों देशों के बीच विभिन्न सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए एक ढांचा तैयार किया जाएगा। बर्लिन में सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। 
जर्मनी की यात्रा करेंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

मंत्रालय ने सिंह की यात्रा से पहले कहा कि सिंह जर्मनी के रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत करेंगे, जिसका मकसद मेक-इन-इंडिया पहल के तहत संयुक्त विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देना है। रक्षा मंत्री की यह यात्रा सात साल के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले फरवरी 2019 में निर्मला सीतारमण ने रक्षा मंत्री के रूप में जर्मनी का दौरा किया था। वहीं, बोरिस पिस्टोरियस जून 2023 में भारत आए थे और उन्होंने सिंह के साथ व्यापक वार्ता की थी। बातचीत के दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने, सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने और साइबर सुरक्षा, कृत्रिम मेधा तथा ड्रोन निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में अवसर तलाशने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, दोनों रक्षा मंत्रियों की मौजूदगी में रक्षा औद्योगिक सहयोग रूपरेखा और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों के प्रशिक्षण में सहयोग से जुड़े क्रियान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधों में भी हाल के वर्षों में गर्मजोशी आई है। निर्यात नियंत्रण में ढील और मामलों के त्वरित निपटारे के कारण जर्मनी से भारत को होने वाला रक्षा निर्यात बढ़ा है। दोनों रक्षा मंत्री भारतीय वायुसेना के लिए छह स्टेल्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति को लेकर अंतर-सरकारी समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। जर्मनी की रक्षा क्षेत्र की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) और मजागोन डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) रक्षा मंत्रालय के साथ लगभग पांच अरब यूरो के सौदे पर कीमत को लेकर बातचीत कर रही हैं। यह सौदा हाल के वर्षों में मेक-इन-इंडिया के तहत सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच जारी रक्षा सहयोग की समीक्षा करने और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशने का मौका भी मौका मिलेगा।