जनप्रवाद ब्यरो, नोएडा। नीट विवाद पर आंदोलन के बाद अब आरक्षण हटाओ आंदोलन सुर्खियों में है। खुद को गैर-राजनीतिक नागरिक आंदोलन बताने वाला यह समूह सरकारी प्रक्रियाओं से जातिगत पहचान खत्म करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार और एक राष्ट्र, एक पहचान की अवधारणा लागू करने की मांग कर रहा है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग
जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार यानी कल हजारों लोग जंतर-मंतर पहुंचे। हाथों में बैनर-पोस्टर और आरक्षण के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण गरीब को मिले, जाति को नहीं और आरक्षण आर्थिक आधार पर करना होगा जैसे नारे लगाए। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश की। हालांकि कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने देर रात प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने के दौरान पुलिस ने जंतर-मंतर से उन्हें हटाया। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक अनुमति दी गई है। वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एनओसी जारी हुई है। अनुमति के तहत अधिकतम 500 लोग प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। वैकल्पिक स्थल की अनुमति के बावजूद प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग जंतर-मंतर से हटने को तैयार नहीं हुआ। उनका कहना था कि प्रदर्शन का आह्वान इसी स्थान के लिए किया गया था, इसलिए वे यहीं अपनी बात रखेंगे।
रिजर्वेशन रिफॉर्म मूवमेंट की मांग
दूसरी ओर सोशल मीडिया से जन्मे रिजर्वेशन रिफॉर्म मूवमेंट के संस्थापक हर्ष दुबे की अपील पर प्रदर्शनकारी राजघाट की ओर रवाना हो गए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में आरक्षण विरोधी नारे लिखी तख्तियां थीं। आयोजकों में शामिल अभिषेक अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर मंच तैयार कर रहे थे और अपनी मांगें पूरी होने तक वहां से हटने को तैयार नहीं थे। हर्ष दुबे ने भी आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिलना चाहिए। अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर करने की मांग भी की गई। इसके अलावा यूजीसी के नए समानता संबंधी प्रावधान वापस लेने, शैक्षणिक संस्थानों में नियमों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग रखी गई। अन्य मांगों की बात करें तो समूह ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। पोस्ट के अनुसार यदि सरकार का उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव खत्म करना है, तो सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए। समूह ने कहा कि व्यक्ति की पहचान जाट-गुर्जर या एससी-एसटी जैसे जातीय आधार पर नहीं होनी चाहिए। उसने सार्वजनिक रूप से जाति प्रदर्शित करने को अवैध घोषित करने की मांग की। इसके साथ ही सरकारी फॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, नौकरी के आवेदन और अन्य सार्वजनिक प्रक्रियाओं में जाति का उल्लेख अनिवार्य नहीं होना चाहिए। समूह ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को वन नेशन, वन आइडेंटिटी, इंडियन बताया है। इसके लिए आरक्षण हटाओ जाति हटाओ नारा दिया है।





