धरती पर जीवन की शुरुआत का मिला सबसे बड़ा प्रमाण, झारखंड के पत्थर ने खोल राज

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। धरती पर जीवन की शुरुआत कैसे और किस रुप में हुई इसको लेकर अब तक का सबसे बड़ा प्रमाण मिला है। जीवन के शुरुआत के सबसे पुराने सुबूत किसी अन्य देश में नहीं बल्कि भारत के झारखंड की चट्टानों में मिले हैं। रिसर्च में साढ़े तीन अरब साल पुराने बायोलॉजिकल अवशेष मिले हैं। ये दुनिया की उत्पत्ति से लेकर उसके विकास तक की सभी धारणाओं को बदलकर रख देंगे।
3.4 अरब साल पुरानी चट्टान मिली 
झारखंड के सिंहभूम इलाके में करीब 3.4 अरब साल पुरानी चट्टान मिली है। जिसमें वैज्ञानिकों को धरती पर शुरूआती जीवन के संकेत मिले हैं। चट्टान में कुछ छोटी काली धारियां और कार्बन के निशान पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये निशान बहुत पुराने सूक्ष्म जीवों से जुड़े हो सकते हैं। इस चट्टान की उम्र की जांच जियोलॉजिकल सर्वे आॅफ इंडिया के वैज्ञानिकों और उनके साथ काम कर रहे दूसरे वैज्ञानिकों ने की है। बता दें धरती पर जीवन की शुरुआत को लेकर माना जाता है कि धरती पर जीवन की शुरूआत लगभग 3.5 से 3.8 अरब साल पहले महासागरों में सूक्ष्म जीवों यानी बैक्टीरिया के रूप में हुई थी। हाल ही में भारत के झारखंड में स्थित सिंहभूम क्रेटन की चट्टानों में लगभग 3.5 अरब साल पुराने जैविक कार्बन के निशान मिले हैं, जो धरती पर शुरूआती जीवन के सबसे पुराने और प्रत्यक्ष सबूतों में शामिल हैं। शोधों और अध्ययन के अनुसार 4.5 अरब वर्ष पहले पृथ्वी का निर्माण एक गर्म और पिघले हुए चट्टानी गोले के रूप में हुआ था। इसके बाद 4 अरब साल पहले उल्कापिंडों की बारिश से धरती पर पानी और बर्फ का आगमन हुआ। इस प्रक्रिया में दुनियाभर में महासागर का निर्माण हुआ। इसके बाद ही समुद्र की गहराई में पहले एककोशिकीय जीवों का जन्म हुआ। 
जियोलॉजिकल ब्लॉक में ज्वालामुखी

सिंहभूम जियोलॉजिकल ब्लॉक में ज्वालामुखी की राख की परतों के बीच दबे हुए सूक्ष्मजीवों के सेल्युलर अवशेष मिले हैं। इन चट्टानों में गहरे रंग की कार्बन-युक्त बैंड और हल्के रंग की सिलिका का मिक्सचर है। यह समय के वातावरण का एक शानदार रिकॉर्ड पेश करते हैं। माइक्रोबियल मैट को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि बहुत सारे छोटे-छोटे जीव एक जगह पर जमा होकर एक परत बना लेते हैं। वैज्ञानिकों ने चट्टान में मौजूद कार्बन के अलग-अलग रूपों की भी जांच की। इससे यह समझने की कोशिश की गई कि कार्बन किसी जीव से जुड़ी प्रक्रिया के कारण बना था या किसी दूसरी वजह से। हैरानी की बात यह है कि धरती पर इतने सालों में हुए बड़े भूवैज्ञानिक बदलावों के बावजूद यह मैटेरियल लगभग सुरक्षित बचा रहा। वैज्ञानिकों ने इस चट्टान की उम्र लगभग 4 अरब साल बताई है। उम्र पता करने के लिए चट्टान में मौजूद बहुत छोटे जिरकॉन नाम के मिनरल्स पार्टिकल्स की जांच की गई। इन पार्टिकल्स में मौजूद यूरेनियम और सीसे के अलग-अलग रूपों की मदद से चट्टान की उम्र निकाली गई। यानी वैज्ञानिकों ने सिर्फ चट्टान की शक्ल देखकर उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगाया, बल्कि वैज्ञानिक जांच के जरिए उसकी उम्र तय की। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने स्पेक्ट्रोस्कोपिक एनालिसिस के जरिए यह पुष्टि की है कि इसमें प्रकाश संश्लेषण के साथ ही कठिन मेटाबोलिक भी मौजूद थे। ये प्राचीन सूक्ष्मजीव समुद्र के नीचे मौजूद गर्म और सिलिका-युक्त हाइड्रोथर्मल वेंट्स की गर्मी में पनपे थे, जो उस समय एक अनूठा इकोसिस्टम बनाते थे।  फिलहाल  वैज्ञानिक इसे जीवन के सबसे पुराने संभावित संकेतों में से एक मान रहे हैं। यह खोज न केवल धरती पर जीवन की शुरुआत के राज खोलेगी बल्कि आने वाले समय में इस पृथ्वी पर क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं इसका भी पता लगाया जा सकेगा।  शोध में बताया गया है कि करीब 3.5 अरब साल पहले धरती आज से बहुत अलग थी। उस समय इंसान, पेड़-पौधे और जानवर नहीं थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय शुरूआती जीवन समुद्र के अंदर या ज्वालामुखी वाले इलाकों के आसपास मौजूद था।