दक्षिण भारत के हितों का रखा पूरा ध्यान, संसद सत्र में सरकार ने दूर किया विपक्षियों का भ्रम

जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। नए सिरे से होने वाले परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों में सीटों कम हो जाएंगी, महिला आरक्षण विधेयक को लेकर ऐसी सभी विपक्षी नेताओं को आशंकाएं थी जिसे सरकार ने लोकसभा में दूर कर दिया। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि दक्षिण भारत के किसी भी राज्य का कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी जनगणना से लिंक कर लें पहले परिसीमन से हमेशा साउथ इंडिया का ही नुकसान होता था, लेकिन इस संशोधन विधेयक से ऐसा कुछ भी नहीं होगा जिसकी आप लोगों को आशंका है। उन्होंने कहा कि हर राज्य में सीधी 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का फैसला ऐतिहासिक है और सभी के साथ न्याय करने वाला है।


उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि 2011 की जनगणना हो या फिर नई जनगणना उस आधार पर परिसीमन नहीं होगा बल्कि यह 2020 में हुए परिसीमन में सीधे तौर पर 50 प्रतिशत का इजाफा होगा। तेजस्वी सूर्या ने संसद में कहा कि केरल में आज 20 सीटें हैं। यदि 2027 की जनगणना के आधार पर ऐसा किया गया तो वहां की सिर्फ 14 सीटें रह जाएंगी। अब यदि महिला आरक्षण लागू हुआ तो वेणुगोपाल के पास ही सीट तक नहीं बचेगी। इसएिल सरकार का यह फैसला है कि किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उसने केरल की 6 सीटों को तो बचाया ही है साथ ही उसका हिस्सा भी बनाकर रखा है। यहां तक कि जनगणना के आंकड़ों की बात करें तो उसका हिस्सा ज्यादा ही रहेगा।

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के हितों की रक्षा करने की बात कही। फिलहाल, सरकार ने केरल की सीटों को बढ़ाकर 30 कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर तमिलनाडु की बात की जाए तो वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ तो फिर वहां  39 सीटों के बजाय 49 सीटें ही रहतीं लेकिन इस सरकार ने 59 का प्रस्ताव रखा है। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि इन लोगों की कोई तैयारी नहीं है बल्कि सिर्फ विरोध करना है। केरल की सीट सिर्फ 23 होतीं और अब उसे 30 मिन रही हैं। साथ ही आंध्र प्रदेश को 37 सीटें मिलने वाली हैं।