जनप्रवाद ब्यूरो। अमेरिका के शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक विदेश मंत्री क्रिस्टोफर यिआव ने लगभग छह साल पहले चीन द्वारा किए गए गुप्त परमाणु परीक्षण के बारे में नयी जानकारी साझा की और अन्य देशों से आग्रह किया कि वे चीन और रूस पर परमाणु निरस्त्रीकरण करने के लिए कदम उठाने का दबाव बनाएं।
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गुप्त भूमिगत परमाणु परीक्षण
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया है कि चीन ने जून 2020 में एक गुप्त भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था। अमेरिका का दावा है कि चीन ने इस धमाके को छिपाने के लिए डीकपलिंग नामक एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया। वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट में बोलते हुए सहायक विदेश मंत्री क्रिस्टोफर येव ने बताया कि कजाकिस्तान के एक रिमोट सीस्मिक स्टेशन ने 22 जून 2020 को 2.75 तीव्रता का एक विस्फोट दर्ज किया था। इस महीने अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार समझौते की समाप्ति के बाद यिआव ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक संस्था के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस समझौते की अवधि खत्म होने से दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर लगी सीमाएं समाप्त हो गई हैं।
पारदर्शिता की मांग
मीडिया रिपोर्ट के अुसार यिआव ने चीन से अधिक पारदर्शिता की मांग की और न्यू स्टार्ट संधि की कुछ कमियों की ओर इशारा करते हुए उदाहरण दिया कि इसमें रूस के गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों के विशाल भंडार का कोई समाधान नहीं किया गया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन में कहा, लेकिन शायद इसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि न्यू स्टार्ट संधि ने चीन द्वारा अभूतपूर्व, सुनियोजित और गुप्त रूप से तैयार किए गए परमाणु हथियारों को ध्यान में नहीं रखा। यिआव ने कहा कि चीन ने जानबूझकर और बेरोक-टोक अपने परमाणु हथियार भंडार में भारी विस्तार किया, जबकि उसने ऐसा न करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने चीन के लक्ष्य या उद्देश्यों के बारे में पारदर्शिता की कमी पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि चीन अगले चार या पांच साल में बराबरी हासिल कर सकता है। बता दें कि यिआव ने जिनेवा में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और मंगलवार को चीनी और अन्य प्रतिनिधिमंडलों से मिलने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारी पहले ही अपने साझेदारों के साथ कई दौर की बैठक कर चुके हैं जिसमें परमाणु हथियार रखने वाले फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं।
डीकपलिंग के काम करने का तरीका
बता दें कि डीकपलिंग एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग भूमिगत परमाणु विस्फोट की तीव्रता को कम करने के लिए किया जाता है। जब कोई देश परमाणु परीक्षण करता है, तो उससे उठने वाली कंपन को दुनिया भर के सीस्मिक स्टेशन तुरंत पकड़ लेते हैं। वहीं डीकपलिंग तकनीक में, परमाणु उपकरण को एक बहुत बड़े और खाली भूमिगत कक्ष के बीच में रखा जाता है। जब धमाका होता है, तो वह खाली जगह एक शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करती है। इससे जमीन में होने वाली हलचल बहुत कम हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से एक बड़े धमाके को भी दुनिया के सामने बहुत छोटा दिखाया जा सकता है। जिससे सीस्मिक डेटा को पढ़ने वाले वैज्ञानिकों को भ्रम हो जाए कि यह कोई छोटा सा विस्फोट या साधारण भूकंप है।





