जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध के बीच भारत के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गुड न्यूज मिली है। तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में अब भारत दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है। इस बड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है।
भारत ने कर दिया करिश्मा
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने आज वह करिश्मा कर दिखाया है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों के होश उड़ा दिए हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने नहले पर दहला मारते हुए देश को उस एलिट क्लब में खड़ा कर दिया है जिसकी जटिल तकनीक अब तक दुनिया के गिने-चुने मुट्ठी भर देशों की जागीर समझी जाती थी। बता दें कि तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेश निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। यह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता है। यह अत्याधुनिक रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यह तकनीक दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही है। बता दें कि यह एक प्रयोग नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में वो न्यूक्लियर धमाका है जो अपनी खपत से कहीं ज्यादा ईंधन पैदा करने की ताकत रखता है। भारत ने अब थोरियम बना पाने की उपलब्धि हासिल कर ली। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कामयाबी पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हर भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताते हुए वैज्ञानिकों के जज्बे को सलाम किया है। पीएम मोदी ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।
यूरेनियम के पीछे भाग रही है दुनिया
बता दें कि पूरी दुनिया यूरेनियम के पीछे भाग रही है। जिसके भंडार सीमित हैं। भारत भी इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। भारत के पास थोरियम का बड़ा भंडार है। ऐसे में चुनौती यह थी कि थोरियम से सीधे बिजली नहीं बनाई जा सकती है। इसे इस्तेमाल करने के लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की जरूरत थी जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने अब सफलतापूर्वक शुरू कर दिया। गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। शाह ने कहा है कि यह सुविधा देश के विशाल थोरियम भंडार में छिपी ऊर्जा का उपयोग करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को ऊर्जा शक्ति बनाने के पीएम मोदी के विजन को साकार करने में यह उपलब्धि सहायक सिद्ध होगी।
पीएफबीआर में ईंधन भरने की शुरुआत
बता दें कि कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी पीएफबीआर में ईंधन भरने की शुरुआत अक्टूबर, 2025 में हुई थी। इस रिएक्टर का संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड कर रहा है। यह देश की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का हिस्सा है। इस रिएक्टर के पूरी तरह चालू होने पर भारत, रूस के बाद व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर वाला दूसरा देश बन जाएगा। बता दें कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर शुरू करने के तीन चरण होते हैं। पहले चरण में प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर के ईंधन के लिए प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग किया जाता है। वहीं दूसरे चरण में बाई-प्रोडक्ट प्लूटोनियम का उपयोग किया जाता है। अतिरिक्त प्लूटोनियम का प्रोडक्शन करने के लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विकसित करने की जरूरत होती है। जिससे थोरियम का विखंडन करने के बाद यूरेनियम में रूपांतरण किया जाता है। इसमें थोरियम का इस्तेमाल कवरिंग में होता है। दूसरा चरण भारत ने पूरा कर लिया है। अब तीसरे चरण की तैयारी हो चुकी है। इस चरण में ऐसे ब्रीडर रिएक्टर से थोरियम-आधारित न्यूक्लियर रिएक्टर से बिजली बनाने का काम किया जाएगा। बता दें कि भारत में दुनिया का सबसे ज्यादा यानी 25 प्रतिशत थोरियम है। ऊर्जा संकट के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भारत अब इस क्षेत्र में अग्रणी हो जाएगा। दूसरे देशों से निर्भरता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।





