जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी में एक अजीबोगरीब गड़बड़ी हुई है। यहां मंदिर में चढ़ाए गए चांदी के छत्र और सिक्के नकली निकले है। यह चांदी के छत्र और सिक्के कैडमियम धातु के निकले है। कैडमियम को बेहद ही खतरनाक धातु माना जाता है। यह खुलासा सरकारी टकसाल में हुई एक जांच ने सामने आया है। इस खुलासे के बाद से ही मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं।
पांच सौ करोड़ की चांदी आखिर कैसे रह गई मात्र तीस करोड़
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने हाल ही में मंदिर में जमा हुए लगभग 20 टन चांदी के चढ़ावे को गलाने और सुरक्षित रखने के लिए सरकारी टकसाल भेजा था। अधिकारियों को उम्मीद थी कि इस मात्रा से मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से लगभग 500 से 550 करोड़ रुपये की चांदी प्राप्त होगी। लेकिन जब इसकी शुद्धता की जांच शुरू हुई, तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच के दौरान जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद डराने वाले हैं। परीक्षण में पता चला कि इन वस्तुओं में शुद्ध चांदी की मात्रा केवल 5 से 6 प्रतिशत ही थी।
बाकी 95 प्रतिशत हिस्सा कैडमियम, लोहा, तांबा और जस्ता जैसी सस्ती धातुओं का मिश्रण पाया गया है। चांदी की कीमत जहां लाखों में है, वहीं कैडमियम मात्र 400 से 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में उपलब्ध है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कैडमियम एक अत्यंत जहरीली और खतरनाक धातु है, जिसका इस्तेमाल उपभोक्ता वस्तुओं में पूरी तरह प्रतिबंधित है। देखने में चांदी जैसा ही दिखने के कारण आम लोग इसे पहचान नहीं पाते और ठगी का शिकार हो जाते हैं।





