मुबंई के फ्रूट मार्केट में लगा फलों का अंबार, कीमतों में गिरावट, किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर व्यापक स्तर पर दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते खाड़ी देशों को होने वाला फलों का निर्यात लगभग रुक गया है जिसकी वजह से मुबंई और नवी मुबंई के आस- पास स्थित मंडियों में फलों का स्टॉक लग गया है। फलों की मात्रा ज्यादा होने के चलते दामों में भी गिरावट आई है। 30 से 40 रुपए किलो मिलने वाला तरबूज की कीमत अब 8 से 10 रुपए हो गई है। इसका सीधा नुकसान किसानों और व्यापारियों दोनों को उठाना पड़ रहा है।

 रमजान के दौरान खाड़ी देशों में भारतीय फलों की काफी मांग रहती है। खासकर तरबूज, पपीता, खरबूजा और अंगूर जैसे फलों का बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है। लेकिन मौजूदा युद्ध और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से निर्यात लगभग ठप हो गया है। नतीजा यह है कि जो फल विदेशों में भेजे जाने थे, वही अब स्थानीय बाजार में आ रहे हैं। इससे मंडी में सप्लाई अचानक बढ़ गई है और दाम गिरते जा रहे हैं।

फलों की कीमतों में भारी गिरावट
वाशी की एपीएमसी मंडी में इन दिनों फलों के दाम तेजी से नीचे आ गए हैं। पपीता, जो पहले 30-35 रुपये प्रति किलो मिलता था, अब 20-25 रुपये में बिक रहा है। वहीं, अंगूर के 9 किलो के कैरेट की कीमत, जो पहले 1500-1600 रुपये थी, अब गिरकर 500-600 रुपये तक पहुंच गई है। इतनी बड़ी गिरावट के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सड़ने लगा फल, बढ़ी परेशानी
मंडी में रोजाना बड़ी मात्रा में फल पहुंच रहे हैं। पहले यहां करीब 2000 टन फल रोजाना आते थे, लेकिन अब इससे भी ज्यादा माल आने लगा है। मांग कम होने के कारण कई बार फल बिक नहीं पाते और खराब होने लगते हैं। मंडी में कई जगह सड़े हुए फलों के ढेर भी दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें व्यापारियों को मजबूरी में फेंकना पड़ रहा है। व्यापारियों और किसानों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार को निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए या राहत पैकेज देना चाहिए, ताकि किसानों और व्यापारियों को कुछ राहत मिल सके।