जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। मोदी सरकार ने अपनी नीतियों से देश को एक बार फिर बड़े संकट से बचा लिया है। मई में भारत का क्रूड आयात अप्रैल की तुलना में 8 फीसदी बढ़ा है। यह फरवरी की तुलना में अब केवल 5 फीसदी कम रह गया है। इसी बीच तेल को लेकर दो बड़ी खबरें भी सामने आई हैं। पहली भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट की सीमा बढ़ गई है। वहीं अमेरिका ने खुद आगे आकर कहा कि वह भारत जितना तेल चाहे वह देने को तैयार है।
देश ने देखा कई मंदी का संकट
देश ने कई मंदी का संकट देखा है। कई बार आर्थिक संकट आए लेकिन देश उससे उबर गया। जानकारों और मीडिया रिपोर्टों में ऐसा कहा जा रहा था कि अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध से जो हालात बने उससे उबर पाना देश के लिए बहुत मुश्किल है। यह संकट देश में बड़ी मंदी लाने वाला था। ऐसा माना जा रहा था कि इससे लाखों ंलोगों की नौकरियां जाती। देश एक बार फिर बड़े आर्थिक संकट में फंस जाता। अभी हाल के दिनों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रायबरेली पहुंचे थे। यहां उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसा आर्थिक तूफान आ रहा है, जिसमें कुछ नहीं टिकेगा। आप लोग तैयार रहें। यह ऐसा आर्थिक संकट होगा जिसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की होगी। हमने अपनी जिंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा होगा। इसके अलावा राहुल ने कहा कि हमें देश के युवा, बेरोजगार, नौजवान को बचाना है, लेकिन प्रधानमंत्री दूसरे काम कर रहे हैं। कांग्रेस नेता का निशाना पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर था। अब यही दूसरा काम यानी विदेश यात्रा देश को संकट से बचाएगी। बता दें कि जब से मोदी सरकार आई है तब से दुनिया भर तेल उत्पादक देशों से भारत के अच्छे रिश्ते हो चुके हैं।
भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़ा
नई रिपोर्ट को देखें तो पता चलता है कि मई में भारत का कच्चे तेल का आयात अप्रैल की तुलना में 8 फीसदी बढ़ गया है। हालांकि यह फरवरी की तुलना में 5 फीसदी कम है। मई में वेनेजुएला भारत का तीसरा बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है जबकि सऊदी अरब और अमेरिका पीछे खिसक गए हैं। रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है जबकि यूएई दूसरे नंबर पर है। वेनेजुएला का तेल हेवी ग्रेड का माना जाता है और सस्ता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और दूसरी कंपनियां जमकर वेनेजुएला से तेल की खरीद कर रही हैं।
एनर्जी कार्गो ट्रैकर केप्लर की रिपोर्ट
रिपोर्ट में एनर्जी कार्गो ट्रैकर केप्लर के हवाले से यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक इस महीने भारत ने वेनेजुएला से रोजाना 417,000 बैरल कच्चा तेल मंगाया है जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 283,000 बैरल था। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था। इसके बाद वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई गई थीं। भारत ने पिछले महीने वेनेजुएला से तेल की खरीद शुरू की थी। मई में अब तक भारत का तेल आयात पिछले महीने के मुकाबले 8 प्रतिशत बढ़कर रोजाना 4.9 मिलियन बैरल पहुंच गया। हालांकि यह फरवरी की तुलना में अब भी 5 फीसदी कम है। उस महीने भारत ने रोजाना 5.2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया था। यह ईरान युद्ध से पहले की बात है। 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज की खाड़ी से तेल की सप्लाई बाधित हुई है। इससे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा है क्योंकि दुनिया का 20 फीसदी तेल यहीं से गुजरता है।
रूसी तेल खरीद पर छूट की मियाद बढ़ी
दूसरी ओर रूसी तेल खरीद पर छूट की मियाद 17 मई को खत्म हो गई थी। इससे कई देश फिक्र में डूब गए थे। अब अमेरिका ने फिर 17 जून तक यह छूट बढ़ा दी है। इसके अलावा इंटरनेशनल मार्केट में तेल की सप्लाई को लेकर मचे हाहाकार के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान सामने आया है। पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने साफ लफ्जों में कहा कि भारत को जितनी एनर्जी और तेल चाहिए, हम उन्हें उतना बेचने को तैयार हैं। रुबियो ने इशारा किया है कि भारत के दरवाजे पर इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी आॅयल डील आकर खड़ी होने वाली है। रुबियो ने आगे कहा कि इस वक्त अमेरिका का तेल उत्पादन और एक्सपोर्ट अपने इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर है। यानी अमेरिका के पास तेल का भंडार है और वो इसका सबसे बड़ा हिस्सा अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त भारत को देना चाहता है। इसी बीच यह भी खबर आई है कि तेल के खेल में अब वेनेजुएला की भी एंट्री हो गई है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार माना जाता है। मार्को रुबियो ने बताया कि वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते खुद भारत की यात्रा पर आ रही हैं। अमेरिका इस दौरे को लेकर बेहद उत्साहित है क्योंकि अमेरिका खुद भारत को वेनेजुएला से सस्ता तेल दिलाने में मध्यस्थता कर रहा है। अगर ये तिकड़ी कामयाब हो गई तो तेल के दाम गिर जाएंगे। बता दें कि ये डील रातों-रात नहीं हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुद खुलासा किया है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच पहले से ही इस बड़ी आॅयल डील को लेकर सीक्रेट बातचीत चल रही थी। अमेरिका चाहता है कि भारत दुनिया के दूसरे देशों से तेल खरीदना थोड़ा कम करे और अमेरिका को अपने एनर्जी पोर्टफोलियो का एक बहुत बड़ा हिस्सा बना ले।





