डीआरडीओ बना रहा दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। डीआरडीओ अब दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल पर काम कर रहा है। यह ऐसी क्रूज मिसाइल है जिसे पानी के अंदर से पनडुब्बी से लांच किया जा सकता है। यह 500 से 800 किलोमीटर तक मार कर सकती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि जब सबमरीन से पाताल लोक का दैत्य दनदनाता हुआ निकलेगा तो कराची समेत कई बड़े शहर पलक झपकते स्वाहा हो जाएंगे।

अमेरिका ईरान जंग ने पूरी दुनिया को बता दिया कि जो समंदर पर राज करेगा, असली ताकत उसकी ही मुट्ठी में होगी। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दुनिया का टेटुआ दबा दिया। ऐसे में कहा जा सकता है कि मौजूदा हालात को देखते हुए तमाम देश डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं। भारत भी उन देशों में शामिल है, जो अटैक के साथ ही डिफेंस फ्रंट पर खुद को मजबूत कर रहा है।  हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में एक साथ तीन खूबियों से तीन वॉरशिप इंडियन नेवी को सौंपा था।  वहीं मौजूदा जरूरतों को देखते हुए डीआरडीओ के वैज्ञानिक नई सबमरीन लांच क्रूज मिसाइल डेवलप कर रहे हैं। इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की रिपोर्ट के अनुसार, पनडुब्बी से लांच की जाने वाली नई क्रूज मिसाइल 500 से 800 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही नई सबमरीन-लांच्ड क्रूज मिसाइल को नौसेना के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट-पी-76 का हिस्सा है। यह स्वदेशी मिसाइल भारत की पारंपरिक पनडुब्बियों को पहली बार समुद्र के भीतर से दूर-दराज के जमीनी लक्ष्यों पर सटीक हमला करने की क्षमता देगी। जिससे नौसेना की अंडरवॉटर स्ट्राइक पावर में बड़ा इजाफा होगा। इस मिसइाल की रेंज इतनी ज्यादा होने वाली है कि अरब सागर से बिना किसी शोर-शराबे के पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची को पलभर में स्वाहा किया जा सकेगा।

बता दें कि डीआरडीओ भारतीय नौसेना की आगामी प्रोजेक्ट-76 श्रेणी की पनडुब्बियों को खास तरह से डिजाइन किया ज सकता है। इससे सबमरीन टॉरपीडो-ट्यूब से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकेगी।  अब तक पारंपरिक पनडुब्बियों की भूमिका मुख्य रूप से सी-डिनायल, दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को निशाना बनाने तक सीमित मानी जाती रही है, लेकिन इस नई क्षमता के साथ प्रोजेक्ट-76 पनडुब्बियां दुश्मन के अंदरूनी इलाकों में स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी हमला करने में सक्षम होंगी। इससे इनकी भूमिका सिर्फ समुद्री युद्ध तक सीमित न रहकर एक रणनीतिक स्ट्राइक प्लेटफॉर्म के रूप में भी उभरेगी। इस क्षमता के केंद्र में डीआरडीओ की वह नई एसएलसीएम है, जिसे निर्भय क्रूज मिसाइल फैमिली के एक विशेष और कॉम्पैक्ट संस्करण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इस मिसाइल को पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाले 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब से लॉन्च किए जाने के लिए डिजाइन की जा रही है। यही इसकी सबसे अहम विशेषता मानी जा रही है। ऐसे में समझा जा सकता है कि मौजूदा सबमरीन स्ट्रक्चर में बिना बड़े बदलाव किए ही इस लंबी दूरी की मारक क्षमता मिसाइल को सेट किया जा सकता है। रिपोर्ट की मानें तो इसे लंबी दूरी की लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल की श्रेणी में रखा जा सकता है। यह पनडुब्बी समुद्र की गहराई में छिपकर दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस, लॉजिस्टिक्स हब, सैन्य ढांचे और अन्य रणनीतिक ठिकानों को स्टैंड-आॅफ दूरी से निशाना बना सकेंगी। युद्ध के शुरूआती चरण में यह क्षमता निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि पनडुब्बी की स्थिति का पता लगाना स्वाभाविक रूप से कठिन होता है। साथ ही पानी के अंदर से किए गए हमले का जवाब देना भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।