आपातकाल को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बताया काला अध्याय 

नई दिल्ली, एजेंसी। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को आपातकाल को भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक करार दिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए खड़े होने वालों को श्रद्धांजलि दी। भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू रहा था, जिससे कार्यपालिका को बहुत ज्यादा शक्तियां मिल गईं और राज्य का अधिकार केंद्र के नियंत्रण में आ गया। मोदी सरकार 2025 से आपातकाल लागू किये जाने को संविधान हत्या दिवस के तौर पर मना रही है। राधाकृष्णन ने एक्स पर कहा, आपातकाल उस दौर की एक गंभीर याद दिलाता है, जब संवैधानिक मूल्यों को ताक पर रख दिया गया था। नागरिक स्वतंत्रता छीन ली गई थी, अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा दी गई थी और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे के मुख्य संस्थानों को कमजोर किया गया था। उपराष्ट्रपति ने लोगों से संविधान के आदर्शों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने और न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व पर आधारित भारत का निर्माण जारी रखने का आग्रह किया।

स्वतंत्रताओं को कुचलने की कोशिश की हिमंत


असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता को कुचलने का एक प्रयास था। आपातकाल को याद करते हुए शर्मा ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, हम भारतीय लोकतंत्र के उस काले अध्याय को याद करते हैं, जब 1975 में आपातकाल लगाया गया था और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों तथा नागरिक स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी वीर योद्धाओं को विनम्र नमन। आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहा, जिसे संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत घोषित किया गया था। 2025 से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाती है। इस संबंध में जारी एक राजपत्र अधिसूचना में कहा गया कि 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित किया गया था और इसके बाद तत्कालीन सरकार द्वारा शक्ति का गंभीर दुरुपयोग किया गया, जिसके दौरान लोगों को ज्यादतियों और अत्याचारों का सामना करना पड़ा।