भारतीय तकनीक की दीवानगी, यूएस के बाद फ्रांस खरीदेगा रोबोट

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। मेडिकल साइंस से लेकर अन्य तकनीकों में खुद को नंबर वन कहलाने वाला अमेरिका अब भारत से तकनीक खरीदने के लिए बेताब है। हम बात ऐसे रोबोट की कर रहे हैं जो कई क्षेत्र में प्रयोग किया जा सकता है। यह एजुकेशन से लेकर मेडिकल और डिफेंस सेक्टर में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका के बाद फ्रांस भी इसे खरीदना चाहता है।
आई हब रोबोटिक्स ने अनोखा रोबोट

भारत की आई हब रोबोटिक्स ने अनोखा रोबोट बनाया है। इसका वजन 100 किलोग्राम है। कंपनी का कहना है कि यह 22 किलो तक का वजन उठा सकता है। इस रोबोट के लिए अमेरिका ने प्रति यूनिट 2.5 करोड़ रुपए का आॅर्डर दिया है। कंपनी का कहना है कि अमेरिका इसका अपने अस्पतालों में इस्तेमाल करेगा। यानी मेडिकल क्षेत्र में इस्तेमाल करने के लिए यह समझौता हुआ है। कंपनी के अनुसार इस रोबोट से अस्पतालों का दरवाजा खोलने के साथ-साथ मरीजों की मॉनिटरिंग जैसे काम करवाए जा सकते हैं। यह हर वक्त मरीजों के पास एक नर्स के तौर पर रहने का भी काम करेगा। इसके अलावा फ्रांस ने भी आर्डर दिया है, लेकिन अभी इसका आर्डर कंफर्म नहीं हुआ है। यह ह्यूमनॉइड रोबोट देखने में इंसानों जैसा लगता है। यह रोबोट एजुकेशन से लेकर मेडिकल और डिफेंस क्षेत्र तक में इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत में भी हर क्षेत्र में कर सकता है काम

 
आई हब रोबोटिक्स का कहना है कि यह रोबोट भारत में भी हर क्षेत्र में काम कर सकता है। इसे एजुकेशन, डिफेंस और मेडिकल के साथ-साथ ऐसी जगहों पर प्रयोग किया जा सकता है, जहां इंसान नहीं जा सकते हैं। ये खतरनाक जगहों पर जाकर वास्तविक रिपोर्ट देने में सक्षम है। कंपनी का कहना है कि हमारा देश भी अन्य देशों की तरह इलेक्ट्रॉनिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में विदेशों के साथ ही देश में भी इसकी डिमांड काफी ज्यादा होने वाली है।
सुपरस्पेशियलिटी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी

बता दें कि भारत के सुपरस्पेशियलिटी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी भी शुरू हो गई है। आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज यानी एम्स भारत का एक प्रमुख मेडिकल संस्थान है। उसने अपने सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग में एक आधुनिक सर्जिकल रोबोट लगाया है। सर्जरी विभाग का कहना है इससे आसानी से आॅपरेशन हो जाते हैं। साथ ही बड़ा फायदा यह हुआ है कि पहले की तुलना में मरीजों को आ

परेशन के बाद कम दिनों तक अस्पताल में रुकना पड़ रहा है। आम तौर पर पहले मरीजों को आपरेशन के बाद चार से पांच दिनों तक अस्पताल में रुकना पड़ता था। जब से रोबोटिक आपरेशन शुरू हुआ है, उसके बाद से महज तीन दिनों के अंदर ही मरीज डिस्चार्ज हो जा रहे हैं। इसी तरह देशभर के अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी फायदेमंद साबित हो रही है।
टेली रोबोटिक सर्जरी दिखा रही कमाल

इसी तरह जटिल टेली रोबोटिक सर्जरी भी अपना कमाल दिखा रही है। हरियाणा के इतिहास में पहली बार फरीदाबाद के निजी अस्पताल से 1500 किलोमीटर दूर कोलकाता के निजी अस्पताल में यह सर्जरी की गई। इसी तरह  रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए हैदराबाद से मुरादाबाद तक और दिल्ली से गुजरात तक की लंबी दूरी की सर्जरी भी सफलतापूर्वक हो चुकी है। जानकारों के अनुसार आने वाला समय भारतीय तकनीक और डॉक्टरों का है, क्योंकि वे विदेशों में भी टेली रोबोटिक सर्जरी कर रहे हैं।