मंगल ग्रह पर बड़ा चमत्कार, खुशी में झूम उठे वैज्ञानिक

जनप्रवाद ब्यूरो। मंगल ग्रह पर नासा के वैज्ञानिकों ने चमत्कारिक खोज की है। पहली बार लाल ग्रह के आसमान में धरती की तरह कड़कती बिजली की आवाज रिकॉर्ड की गई है। इसे इसलिए चमत्कार माना जा रहा है क्योंकि मंगल पर पानी और बादलों की भारी कमी है। ऐसे में बिजली का पैदा होना एक रहस्य जैसा है। यह अध्ययन मंगल पर मानव जीवन की खोज में भी मदद करेगा।
स्पेशक्राफ्ट ने मंगल ग्रह पर पकड़ी कई अनोखी चीजें 

बर्फीले, वीरान और सूखे मंगल पर अचानक बिजली की कड़कती आवाज ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। यह आवाज बिना बादल और बिना तूफान के सुनाई दी है। बता दें कि नाासा का मेवेन स्पेसक्राफ्ट मंगल पर लगातार खोज कर रहा है। चार सालों में इस स्पेशक्राफ्ट ने मंगल ग्रह पर कई अनोखी चीजें पकड़ी थी। अब पहली बार लाल ग्रह पर विस्लर नाम के रेडियो सिग्नल का पता लगाया है। यह सिग्नल मंगल पर बिजली के कड़कने की आवाज है। यह वैसा ही है जैया धरती पर बिजली कड़कने पर सुनाई देता है। इस खोज से यह साफ हो गया है कि मंगल ग्रह का वातावरण सिर्फ धूल भरा ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिकली एक्टिव भी है।
डेटा का जब बारीकी से एनालिसिस

रिकॉर्ड किए गए इस डेटा का जब बारीकी से एनालिसिस किया गया तो पता चला कि वहां बिजली गिरने की घटनाएं होती हैं। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मंगल पर पानी और बादलों की भारी कमी है। वहां बिजली का पैदा होना एक चमत्कार जैसा है। बता दें कि वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात को लेकर कंफ्यूज थे कि क्या मंगल पर बिजली कड़क सकती है। धरती पर बिजली तब पैदा होती है जब पानी की बूंदें और बर्फ के टुकड़े आपस में टकराते हैं। मंगल पर पानी बहुत कम है, इसलिए वहां बिजली की उम्मीद ही नहीं थी। इस नई रिसर्च ने बताया है कि वहां धूल के कण आपस में रगड़ खाकर चार्ज पैदा करते हैं। जब यह चार्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वह बिजली के रूप में डिस्चार्ज होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मंगल पर बिजली कड़कने के नियम भी वैसे ही हैं, जैसे हमारी धरती पर काम करते हैं। यह खोज साबित करती है कि ग्रहों का वातावरण भले ही अलग हो, लेकिन फिजिक्स के नियम हर जगह एक जैसे ही रहते हैं।
मंगल की हवा बेहद पतली

बता दें कि मंगल की हवा बेहद पतली है फिर भी वहां इलेक्ट्रिक चार्ज बन रहा है। ये स्पार्क्स मंगल की केमिस्ट्री बदल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर समझा जाए तो यहां रिएक्टिव कंपाउंड बनाना हैरान करने वाला है। नेचर जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन बताता है कि यह खोज मंगल के रहस्यों का सिर्फ पहला दरवाजा खोलती है। अध्ययन के अनुसार जब भी कहीं बिजली गिरती है, तो वह सिर्फ रोशनी ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन भी छोड़ती है। इसमें बहुत कम फ्रीक्वेंसी वाली रेडियो वेव्स भी पैदा होती हैं। जब ये लहरें किसी ग्रह के वातावरण से होकर गुजरती हैं, तो इनकी स्पीड बदल जाती है। हाई फ्रीक्वेंसी वाली लहरें तेज चलती हैं और लो फ्रीक्वेंसी वाली धीरे चलती हैं। इसकी वजह से यह सिग्नल खिंच जाता है और सुनने में किसी गिरती हुई टोन जैसा लगता है। इसी को वैज्ञानिक विस्लर कहते हैं। यह अध्ययन मंगल पर पानी की खोज की दिशा में मदद करेगा। बता दें कि नासा के रोवर ने 55 बार बिजली के कड़कने की घटनाएं रिकॉर्ड की हंै। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा हर बार नहीं होता कि केवल धूल के कणों के घर्षण से बिजली पैदा होने की आवाज आए। यह भी हो सकता है कि धरती की तरह वहां भी पानी की बूंदें और बर्फ के टुकड़े आपस में टकराते हों। फिलहाल, अभी कुछ भी कहना मुश्किल है कि लाल ग्रह पर जीवन की कितनी संभावनाएं हैं, लेकिन इस रिसर्च ने पानी की खोज की दिशा के दरवाजे खोल दिए हैं।