जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। कानपुर किडनी कांड में एक और नये खुलासे ने सभी को चौंका दिया है। बीते शनिवार को केशवनगर के आहुजा अस्पताल में आयुष की किडनी निकालकर पार्सल के लिए लगाने वाली आठ लोगों की टीम में एक भी सर्जन नहीं था। आठ के आठ झोलाछाप डॉक्टर थे। अभी तक जिस अली नामक व्यक्ति को डॉक्टर बताया जा रहा था वह कोई डॉक्टर नहीं बल्कि ओटी का मैनेजर था। डॉक्टर अली का पूरा नाम मुस्सर्रत अली सिद्दीकी है। वह दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। पुलिस ने जानकारी होने के बाद शुक्रवार को उसके घर पर भी छापेमारी की। फिलहाल, वह मोबाइल बंद कर वह फरार है। उसकी पत्नी ने पुलिस को बताया कि वह डॉक्टर नहीं है।

बता दें कि गुरुवार को गाजियाबाद निवासी ओटी मैनेजर राजेश कुमार और ओटी असिस्टेंट कुलदीप सिंह राय को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी का कहना है कि पूछताछ में बताया गया है कि अली किडनी निकालने और लगाने का काम करता था। जितने भी आॅपरेशन हुए सभी झोलाछाप डॉक्टर अली ने किए। बीते 28 मार्च की रात कैथ पल्सर के आहुआ अस्पताल में आॅपरेशन हुआ था, जिसमें अली, राजेश कुमार और कुलदीप तीनों एक कार से गाजियाबाद गए थे। डीसीपी के अनुसार इन पांच लोगों में एक भी सर्जन नहीं है। कानपुर की टीम ने मुस्सर्रत अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली के दिल्ली स्थित उत्तम नगर स्थित फ्लैट पर छापेमारी की, लेकिन वहां अली नहीं मिला। घर पर उसकी पत्नी आशिया सिद्दीकी मिली। जब उससे पूछताछ की गईतो उसने बताया कि अली कुछ महीने पहले दिल्ली के आकाश अस्पताल में ओटी मैनेजर था। काफी समय से वह खाली चल रहा है।





