जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। अमेरिका-युद्ध के बीच भारत में बढ़ते ईंधन संकट के बीच एक आश्चर्यचकित करने वाला नजारा देखने को मिला है। देश के सबसे बड़े अंडरग्राउंड एलपीजी स्टोरेज पर अमेरिका और रूस के जहाज क्रूड ऑयल और एलपीजी लेकर पहुंच गए हैं। इसमें आश्चर्यजनक बात यह है कि अमेरिका ने रूसी तेल को लेकर भारत पर टैरिफ लगाया था। अब होर्मुज में जहाज फंसने के चलते भारत में गैस की समस्या को देखते हुए अमेरिका और रूस ने भारत में गैस और क्रूड ऑयल के जहाज भेज दिए। दोनों देशों के जहाज न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचे।

पीटीआई भाषा के अनुसार पोपियस पाइथिनियर नामक जहाज बीते माह 14 फरवरी को टेक्सास के पोर्ट ऑफ नीदरलैंड्स से रवाना गया गया था। इसमें 16,714 टन एलपीजी लाई गई है। यह जहाज रूसी जहाज एक्का टाइटन के एक दिन बाद आया है। बता दें कि रूसी जहाज की एंट्री एक दिन पहले हुई थी। कच्चे तेल का यह रूसी जहाज पहले चीन जा रहा था, लेकिन भारत में भारी किल्लत को देखते हुए उसे भारत की ओर मोड़ दियाग या था। शनिवार शाम मंगलूर तट के पास पहुंचा, जिसमें करीब 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल था।

मंगलूरु तट पर पहुंचा तेल
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि इस कच्चे तेल को समुद्र में बनी पाइपलाइन के जरिए मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड तक पहुंचाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मंत्रालय ने 14 मार्च से 31 मार्च तक न्यू मंगलूर पोर्ट पर क्रूड और एलपीजी के लिए शुल्क माफ कर इन ऑपरेशन को आसान बना दिया है। इसके बाद से आयात गतिविधियों के बीच संचालन और भी आसान हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद फारस की खाड़ी में भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं।
रूसी टैंकरों ने किया भारत का रुख
बताया जा रहा है कि एक्का टाइटन समेत कम से कम 7 टैंकरों ने चीन यात्रा के दौरान बीच में रास्ता बदला है। केंद्रीय मंत्रालय में विशेष सचिव ने बताया था कि एक्का टाइटन एमआरपीएल की तरफ से चार्टर्ड किया गया था और इसके जल्द मंगलूर बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद थी।





