जनप्रवाद ब्यूरो टीम। कतर में दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्लांट रास लफ्फान पर ईरान के हमले के बाद इसका पूरी दुनिया पर व्यापक असर पड़ सकता है। इस बड़े संकट की आहट को ऐसे समझा जा सकता है कि भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 लागू कर दी है।
सबसे बड़े एलएनजी प्लांट हमला
दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्लांट रास लफ्फान पर ईरान के हमले के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। पेरिस के सेंटर आॅन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी का मानना है कि इसकी मरम्मत में लंबा समय लग सकता है। सेंटर के विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मरम्मत में महीनों लग सकते हैं। ऐसा अनुमान है कि रास लफ्फान इस साल के आखिर तक शायद शुरू नहीं हो पाएगा। इसमें पांच साल भी लग सकते हैं और ऐसे में दुनियाभर में गैस की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। ईरान ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिका के आधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है। यह अमेरिका के सबसे मूल्यवान, आधुनिक और ताकतवर लड़ाकू विमानों में से एक है। इसे अमेरिका की पांचवीं पीढ़ी की युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने बताया कि ईरान द्वारा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से उनके एफ-35 लड़ाकू विमान को आपात लैंडिंग करनी पड़ी। विमान का पायलट सुरक्षित है और इस घटना की जांच की जा रही है। ईरान का दावा है कि हमले के बाद लड़ाकू विमान क्रैश हो गया।
आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 लागू
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेल और गैस के वैश्विक संकट के चलते सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 को लागू कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस के उत्पादनों से जुड़ी कंपनियों को ताजा डेटा साझा करना अनिवार्य हो गया है। बता दें कि पीपीएसी तेल मंत्रालय का डेटा इकट्ठा करने वाला विभाग है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है। जिसके अनुसार, पीपीएसी को सूचनाओं को इकट्ठा करने, संकलन करने, रखरखाव करने और विश्लेषण करने वाली एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इससे तेल मंत्रालय को आपात स्थिति में योजना बनाने में मदद मिलेगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाता है और इसके उल्लंघन पर जेल की सजा भी हो सकती है। बता दें कि आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह शक्ति देता है कि वे नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम तौर पर चीजों की कमी पैदा होने से रोके। एक तरह से यह कानून, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मददगार है।
किसी निष्कर्ष पर पहुंचता नहीं दिख रहा युद्ध
दूसरी ओर अमेरिका-इजरायल का ईरान के खिलाफ बीते 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध किसी निष्कर्ष पर पहुंचता नहीं दिख रहा है। पश्चिम एशिया के हालात तनावपूर्ण हैं। एकदूसरे के खिलाफ मिसाइलें दागी जा रही हैं। लोगों की जानें जा रही हैं। ईरान की कमान अब नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के हाथों में हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में विशेष प्रतिनिधि अयातुल्लाह हाकिम अली इलाही ने एक बयान जारी किया जो इस संकट को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि यह युद्ध कितने समय तक चलेगा। हम इसे जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए तैयार हैं। हमारी कुछ शर्तें हैं। अगर वे समझौते के लिए आगे नहीं आते हैं, तो हम युद्ध जारी रखने के लिए भी तैयार हैं। हमारे पास इतनी शक्ति है कि हम इस युद्ध को दो-तीन साल से अधिक समय तक भी जारी रख सकते हैं।





