जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: कानपुर स्थित जाजमऊ इलाके में मंगलवार रात एक बड़ी दुर्घटना हो गई। मंगलवार रात को वाजिदपुर स्थित एक जूता फैक्ट्री से अचानक आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। रिहायशी इलाके में स्थित इस फैक्ट्री में लगी आग इतनी विकराल थी कि आसमान में करीब 20 मीटर ऊंची लपटें साफ देखी जा सकती थीं। कानपुर में हुए इस हादसे ने करोड़ों की संपत्ति को जलाकर राख कर दिया।
सात दिन पहले लगा करोड़ों का सेटअप खाक
वाजिदपुर में स्थित एसएच इंटरनेशनल नाम की इस फैक्ट्री में आग लगने की खबर मालिक नौशाद अहमद को रात करीब 8 बजे मिली। जब तक वे मौके पर पहुंचे तब तक शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई यह चिंगारी पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले चुकी थी। विडंबना यह रही कि नौशाद ने महज सात दिन पहले ही जूता फिनिशिंग का करीब 2 करोड़ रुपए का नया सेटअप यहां लगाया था। यह मशीनरी और पूरा सेटअप देखते ही देखते आग की भेंट चढ़ गया। आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को भी कीमती सामान बाहर निकालने का मौका नहीं मिला।
संकरी गलियों में फंसी दमकल की गाड़ियां और बढ़ी मुश्किल
जैसे ही आग की सूचना मिली, दमकल की गाड़ियां घटनास्थल की ओर रवाना हुईं, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी। रिहायशी इलाके की संकरी गलियों के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सीधे फैक्ट्री तक नहीं पहुंच पाईं। मजबूरन दमकल कर्मियों को मुख्य सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी करनी पड़ीं और वहां से करीब 100 मीटर दूर पाइप लाइन बिछानी पड़ी। सूचना मिलने के करीब 35 मिनट बाद दमकल की गाड़ी पहुंच सकी, जिसने आग को फैलने का और ज्यादा समय दे दिया। आसपास की टेनरियों के कर्मचारियों ने भी शुरुआत में आग बुझाने की कोशिश की पर लपटों की तेजी के आगे वे बेबस नजर आए।
पांच घंटे का कड़ा संघर्ष, फिर भी सबकुछ खाक
इस भीषण आग पर काबू पाने के लिए कानपुर के 7 अलग-अलग फायर स्टेशनों से टीमों को बुलाना पड़ा। जाजमऊ, मीरपुर, किदवई नगर और फजलगंज समेत कई थानों की गाड़ियों ने मोर्चा संभाला। आग बुझाने के लिए आईए टेनरी और बीमा अस्पताल से करीब 23 बार पानी भरकर लाया गया तब जाकर 5 घंटे की मशक्कत के बाद लपटें शांत हुईं।





