खामेनेई की मौत से हमले और तेज, सैन्य ठिकानों पर दागीं जा रहीं मिसाइलें

जनप्रवाद ब्यूरो। ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध और तेज हो गया है। ईरान के जवाबी हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इसका कारण है कि ईरान ने जवाब में इस्राइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिसके चलते हर तरफ विस्फोट और तबाही के दृश्य हैं। इसका चौतरफा असर हो रहा है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बारे में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी ने नया अपडेट जारी किया है। इसके अनुसार अमेरिका और इजरायल ने हमलों से पहले कई महीनों तक ईरान के शीर्ष नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखी थी। खामेनेई की रोजमर्रा की गतिविधियों में यह जानने की कोशिश की गई थी कि वे कहां रहते हैं। किन लोगों से मिलते हैं, कैसे बातचीत करते हैं और खतरे की स्थिति में कहां छिप सकते हैं। साथ ही उन अन्य राजनीतिक और सैन्य नेताओं पर भी नजर रखी जा रही थी जो उनसे मिलते थे। अमेरिकी एजेंसियों ने जो खुफिया जानकारी जुटाई, उसे इजरायली अधिकारियों के साथ साझा किया। इसी जानकारी के आधार पर संयुक्त हमले का समय तय किया गया।  
36 घंटों से आग की लपटों में पश्चिम एशिया 

खामेनेई के मारे जाने के बाद अब युद्ध और तेज हो गया है। बता दें कि बीते 36 घंटों से पश्चिम एशिया आग की लपटों में है। ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमलों ने दुनियाभर में हलचल तेज कर दी है। दूसरी ओर ईरान के जवाबी हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इसका कारण है कि ईरान ने जवाब में इस्राइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। जिसके चलते हर तरफ विस्फोट और तबाही के दृश्य हैं। इस हिंसक संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार, तेल की कीमतों और दुनिया की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
ईरान पर अपने हमले और तेज कर दिए

अमेरिकी सेना ने अब ईरान पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुख्यालय को पूरी तरह मलबे में बदल दिया है। ईरान की राजधानी तेहरान के विभिन्न हिस्सों में लगातार जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं हैं, जिससे शहर में तनाव और भय का माहौल बन गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, मिसाइल और हवाई हमलों के कारण राजधानी के उत्तरी, पश्चिमी और केंद्रीय इलाकों में धमाके गूंज रहे हैं और आसमान में धुएं के गुबार उठते देखे गए हैं। अब खबर है कि ईरान के खिलाफ जंग में नाटो उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो युद्ध की स्थिति और भीषण हो जाएगी।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर का बड़ा ऐलान

दूसरी ओर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने बड़ा ऐलान किया। उनके अनुसार अमेरिका ब्रिटिश सैन्य बेस का इस्तेमाल करेगा। स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों (बेस) के इस्तेमाल की अनुमति देगा। इसका मकसद ईरान के मिसाइल खतरों का मुकाबला करना है। स्टार्मर ने साफ किया कि यह अनुमति केवल खास और सीमित बचाव के लिए दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंदन, ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सीधे हमले में शामिल नहीं हो रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने वीडियो संदेश किया जारी

संघर्ष और फिर बढ़ते हमलों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने एक वीडियो संदेश जारी कर ईरान को फिर से चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक अमेरिका के मजबूत उद्देश्य पूरे नहीं होते। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की शहादत के बाद अमेरिका और इस्राइल ने आतंकवादियों को निर्णायक और दर्दनाक जवाब देने की कसम खाई। वीडियो संदेश में ट्रंप ने आगे कहा कि यह युद्ध केवल सत्ता नहीं बल्कि न्याय और सुरक्षा की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि पिछले 36 घंटों में अमेरिका और उसके साझेदारों ने आॅपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा और जटिल सैन्य अभियान है। उन्होंने कहा कि इस हमले में ईरान के सैकड़ों लक्ष्य निशाना बनाए गए हैं, जिसमें ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सुविधाएं और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
इजरायल और हिजबुल्ला के बीच हुई गोलीबारी

युद्ध के बीच लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने भी एक रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार इजरायल और हिजबुल्ला के बीच हुई गोलीबारी के बाद देश के दक्षिणी हिस्से से लोगों का भारी पलायन शुरू हो गया है। टायर क्षेत्र से बेरूत और उत्तरी लेबनान की ओर बड़ी संख्या में लोग जा रहे हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कम से कम 53 गांवों और कस्बों के निवासियों को अपने घर खाली करने का आदेश दिया है, जिससे स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है।